पीएम की चुप्पी से लगता है उनकी सहमति है: सोनिया

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देश में कथित बढ़ती असहिष्णुता के मुद्दे पर मंगलवार को सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाक़ात की है.

कांग्रेस के इस शिष्टमंडल में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और लोक सभा व राज्यसभा सांसद भी शामिल थे.

दोपहर 3.30 बजे कांग्रेस नेता गांधी स्मृति पर इकट्ठा हुए और फिर उन्होंने राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च किया.

इन नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाक़ात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा. मुलाकात के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि ज्ञापन में भय, असनशीलता, धमकी के माहौल पर चिंता जताई गई है. ये सब सोची समझी रणनिति का हिस्सा है.

सोनिया ने कहा कि ख़ास संगठन जो सत्ता से जुड़े हैं भारत की संस्कृति पर हमला कर रहे हैं. प्रधानमंत्री खामोश हैं इसका मतलब कि इसमें उनकी सहमति है.

इससे पहले, सोमवार को भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाक़ात की थी.

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सोनिया गांधी की राष्ट्रपति से मुलाक़ात ऐसे समय में हुई है, जब पार्टी सांप्रदायिकता को लेकर केंद्र सरकार पर ज़ोरदार हमले कर रही है.

नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बिहार में एक चुनावी रैली में 1984 में सिख विरोधी दंगों का ज़िक्र करते हुए कहा था कि कांग्रेस को सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने पूर्णिया में जनसभा को संबोधित करते हुए यहा तक कहा, ''दो नवंबर 1984 और उसके दूसरे दिन, तीसरे दिन, सिखों का क़त्ल हो रहा था, उसी दो नवंबर को कांग्रेस सहिष्णुता की बात कर रही है...आप ड्रामेबाज़ी कर रहे हो."

इस बयान पर कांग्रेस नेता पीसी चाको ने मीडिया से कहा कि गोधरा (गुजरात दंगों) के लिए प्रधानमंत्री को माफ़ी मांगनी चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि नवंबर 1984 में जो भी हुआ वह किसी के नियंत्रण में नहीं था.

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