अल्पसंख्यकों की नाराज़गी ग़लत नहीं: अरुण शौरी

अरूण शोरी इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption अरूण शोरी ने पहले भी सरकार पर तीखी टिपण्णियां की हैं.

वाजपेयी सरकार के कैबिनेट में मंत्री रहे अरूण शौरी ने कहा है कि अल्पसंख्यक समुदायों की नाराज़गी और उनके निष्कर्ष ग़लत नहीं हैं.

भारतीय चैनल इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम में इंटरव्यू देते हुए शौरी ने कहा, "हमें जागना होगा और ख़तरा है. आईएसआईएस हमारे दरवाज़े पर है. यदि 100 मुसलमान युवक ये मान लेते हैं कि उन्हें आतंकवादी संगठन में शामिल होना है तो ये बड़ी समस्या बन जाएगी."

अरूण शौरी ने ये भी कहा कि बिहार चुनाव में दिए गए भाषणों के बाद नरेंद्र मोदी लालू प्रसाद यादव के स्तर पर नज़र आ रहे हैं और नीतीश कुमार तो 'स्टेट्समैन' लगते हैं.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption दादरी में बीफ़ खाने की अफ़वाह के बाद भीड़ ने मुसलमान व्यक्ति की हत्या कर दी.

इस इंटरव्यू में इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व संपादक ने मोदी के चुनाव के दौरान दिए गए भाषण का हवाला दिया.

उन्होंने कहा, “अगर आप चुनाव में दिए गए भाषणों को देखते हैं तो उन्होंने पिंक रेवोल्यूशन की बात की थी. आप बीफ़ के मामले पर हुए विवाद को इससे जोड़कर देख सकते हैं. इन सारी बातों को उन लोगों ने बढ़ावा दिया जो मोदी के आसपास होते हैं और वो भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करते हैं. जबकि दादरी हत्याकांड पर उन्होंने (मोदी) ने ख़ामोशी नहीं तोड़ी.”

शौरी का कहना था कि प्रधानमंत्री को नैतिकता का स्तर तय करना होगा और दूसरों को रास्ता दिखाना होगा.

केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा पर टिप्पणी करते हुए अरुण शौरी ने कहा कि शर्मा का पूर्व राष्ट्रपति कलाम के बारे बयान और फिर उन्हें वहीं बंगला दिया जाना जिसमें पूर्व राष्ट्रपति कलाम रहते थे, आभास देता है कि जैसे शर्मा को उनके किए के लिए नवाज़ा जा रहा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार