पाकिस्तान की 'नई उम्मीद' रहील शरीफ़ ?

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ट्रक आर्ट पाकिस्तान का वो मशहूर फन है जो लोगों की राय भी दर्शाता है. इसी फन के चलते एक नया चेहरा सामने आया है.

हाजी हबीब और रहमान इस फन से 60 साल से जुड़े हुए हैं. उनकी आंखें जवाब दे गई हैं लेकिन वो अब अन्य कलाकारों को यह काम सिखा रहे हैं.

उनका कहना है कि पाकिस्तान के बड़े लोगों की तस्वीरों के लिए ट्रक के मालिक और ड्राइवर ख़ासतौर पर अनुरोध करते हैं.

ट्रकों पर पेंटिंग बनाने वाले ऐसे ही एक पेंटर कहते हैं, "ट्रकों पर सबसे ज़्यादा बेनज़ीर भुट्टो उसके बाद अयूब खान फिर जनरल जिया उल हक की तस्वीरें बनती है."

रहील शरीफ़ के इस फेहरिस्त में शामिल होने के सवाल पर वो कहते हैं, "यह तो अल्लाह ही बेहतर जानता है. लेकिन जैसे वो चल रहे हैं वो इन सबसे भी आगे निकल सकते हैं."

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जनरल रहील शरीफ़ की लोकप्रियता ट्रक आर्ट तक सीमित नहीं. इस्लामाबाद और रावलपिंडी के बीच पड़ने वाले गौसिया टाउन नामक हाउसिंग सोसाइटी में इलाके के लोगों ने जनरल रहील के नाम की मस्जिद बनवा रखी है.

देखने में तो यह मस्जिद बहुत ही जल्दबाज़ी में बनी दिखती है और यहां के लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जनरल शरीफ़ यहां के कब्ज़ा माफिया से लोगों को निजात दिलाएंगे.

सोशल मीडिया पर भी जनरल शरीफ़ की धूम है. पिछले 10 महीने से 'शुक्रीया रहील शरीफ़' और 'थैंक्यू रहील शरीफ़' नाम से हैशटैग सोशल मीडिया पर रोज़ाना सैकड़ों बार इस्तेमाल हुआ है.

कराची में हर तरफ उनके बैनर हों या जनरल रहील और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के बीच मुकाबला, उन्हें हर तरफ एक हीरो और पाकिस्तान का मसीहा बताया जा रहा है.

जनररल रहील को शिद्दत पसंदी और भ्रष्टाचार के खात्मे और पाकिस्तान की हर मुश्किल के हल के लिए सरहा गया है. कुछ लोग तो यह हैशटैग तंज के तौर पर भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

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एक निजी टीवी चैनल के निर्माता ने फेसबुक पर हर रोज़ हर लम्हे को रहील शरीफ़ के नाम किया. जैसे उन्होंने लिखा, "आज खरबूजा बहुत मीठा निकला, शुक्रिया रहील शरीफ़." और "एक लड़की ने मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा, शुक्रिया रहील शरीफ़."

यहां तक कि ट्विटर पर पाकिस्तानी क्रिकेट टीम अगर कोई मैच जीते तो वो भी जनरल रहील शरीफ़ की वजह से है और राजनीतिज्ञ भी फौज के प्रमुख की लोकप्रियता को मानते हैं.

तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान भी अपने कई सम्मेलन में यह बात कह चुके हैं.

उन्होंने कहा, "आज अगर पाकिस्तानी फौज और जनरल रहील का ग्राफ ऊपर जा रहा है तो उसकी क्या वजह है. वजह यह है कि कौम तंग आई हुई है इन चोरों से."

सुरक्षा मुद्दों पर लिखने वाले पत्रकार उमर फारूख का कहना है कि इस तरह से शख्सियत परस्ती फौज की छवि के लिए नुकसानदेह हो सकती है.

वो कहते हैं, "एक सेना प्रमुख को इस तरह दिखाना कि वो देश के रखवाले हैं यह सबकुछ शुरू हुआ था स्वात ऑपरेशन से."

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उन्होंने बताया, "जब स्वात ऑपरेशन में सेना ने सरकार से कहा था कि हमें आम सहमति चाहिए क्योंकि हम समाज के एक वर्ग के खिलाफ कार्रवाई करेंगे."

वो कहते हैं, "लेकिन मेरे हिसाब से अब ये कुछ ज़्यादा हो गया है. जब संस्थागत आवश्यकता से बात आगे चली गई है और अब यह एक व्यक्ति विशेष पर केंद्रित हो गई है."

जनरल रहील के हक में मुहिम करने का एक और पहलु है. रावलपिंडी के रिहायशी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नाराज़ कार्यकर्ता मलिक मोहम्मद यूसुफ सियासतदारों से बहुत मायूस हैं.

वो अपनी गाड़ी पर जनरल रहील के कार्यकाल को बढ़ाने के हक में स्टिकर लगवा रहे हैं. वो कहते हैं, "अगर मुल्क के हालात इसी तरह रहेंगे तो मुश्किल वक़्त आने में देर नहीं लगेगी."

उन्होंने आगे कहा, "अगर रहील शरीफ़ का कार्यकाल बढ़ता है तो वो लगातार तीसरे चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ होंगे जिनका कार्यकाल बढ़ेगा. जनरल परवेज़ मुशर्रफ और जनरल अशफाक परवेज़ कियानी का कार्यकाल इससे पहले बढ़ा है."

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हालांकि उन्होंने यह भी कहा इससे एक नकारात्मक संदेश भी जाएगा.

वो कहते हैं, "एक तो यह सवाल उठेगा कि आपके पास इस तरह के अफ़सर मौजूद नहीं हैं जो उनकी जगह ले सकें और दूसरा यह कि एक्सटेंशन के बाद उसमें राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ने लगेगा."

विशेषज्ञ तो यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह कोशिश एक संगठित कोशिश है ?

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