पांच रुपये में दाल-भात और सब्ज़ी

दाल-भात, झारखंड इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

दाल की क़ीमत पर देश भर में मचे बवाल के बीच झारखंड से एक अच्छी खबर है. अगर आपकी जेब में पांच रुपये हैं, तो यहां भरपेट दाल-भात खा सकते हैं. आलू-सोयाबीन या चने की सब्जी बोनस में.

यह संभव हो पा रहा है मुख्यमंत्री दाल भात योजना के कारण.

इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

बतौर मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस योजना की शुरुआत साल 2011 में कराई थी जिसके तहत तहत गरीबों को दिन का भोजन कराया जाता है. तब राज्य में इसके 100 केंद्र खोले गए थे.

इसके लिए सरकार रियायती दरों पर चावल उपलब्ध कराती है. यह चावल अंत्योदय योजना के तहत केंद्र से मिलता है.

खाद्य और आपूर्ति विभाग के सचिव विनय चौबे ने बीबीसी को बताया कि झारखंड के 24 जिलों में 400 दाल-भात केंद्र चलाए जा रहे हैं.

यहां पांच रुपये में 200 ग्राम दाल-भात-सब्जी दी जाती है. इसमें दाल देना अनिवार्य है क्योंकि दाल का नाम इस योजना के नाम के साथ जुड़ा है.

इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

सरकार इन्हें एक रुपये प्रति किलो के हिसाब से चावल उपलब्ध कराती है. इसके साथ सोयाबीन और चना मुफ्त दिया जाता है. करीब 12 लाख लोग रोज इन केंद्रों पर दाल-भात खा रहे हैं.

रांची के एजी मोड़ पर दाल-भात केंद्र चलाने वाली पिंकी अरोड़ा और शीला देवी ने बताया कि उन्हें दाल की खऱीद बाज़ार से करनी पड़ती है. इसके लिए कोई सब्सिडी नहीं है.

महिला मंगल सहयोग समिति डोरंडा यह केंद्र साल 2011 से ही चला रही है. पिंकी ने बताया कि यहां करीब 350 लोग रोज खाना खाते हैं. शाम चार बजे केंद्र बंद हो जाता है.

इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

इसके तहत सिर्फ दिन का खाना खिलाने का प्रावधान है.

यहां हमारी मुलाकात गोस्नर कॉलेज के छात्र गोकुल कुमार से हुई. उन्होंने बताया कि वह रोज़ यही पर लंच करते हैं. इससे उनके पैसे बच जाते हैं जबकि रात के खाने के लिए टिफिन लगा रखा है.

कैसी है दाल? इसके जवाब में गोकुल कहते हैं, "कम से कम काली तो नहीं है. यहां मसूर की दाल परोसी जाती है. इसकी कीमत बाज़ार में 100 रुपये किलो है."

इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

रांची के सरकारी बस स्टैंड के पास दाल-भात केंद्र चलाने वाले जितेंद्र कुमार ने बताया कि पांच रुपये प्रति प्लेट बेचने के बावजूद लागत निकल जाती है. उन्हें दाल खिलाने में कोई परेशानी नहीं होती.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार