15 क्षेत्रों में विदेशी निवेश संबंधी सुधार

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भारत सरकार ने मंगलवार को विदेशी निवेश में सुधारों और उदारीकरण का ऐलान करते हुए 15 अहम क्षेत्रों में विदेशी निवेश के लिए ढील दी है.

इनमें खनन, नागरिक उड्डयन, कन्सट्रकशन, रक्षा और प्रसारण क्षेत्र प्रमुख हैं.

सरकार ने विदेशी निवेश बोर्ड की शक्तियां बढ़ाते हुए उसे 5000 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्टों को क्लियर करने का अधिकार दिया है.

सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल के क्षेत्र में ढील देते हुए कंपनियों को ई-कॉमर्स के ज़रिए उत्पाद बेचने की अनुमति दी है.

सरकार ने रबर, कॉफी, इलायची, ताड़ और और जैतून को लगाने के लिए सौ प्रतिशत विदेशी निवेश को अनुमति दी है.

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Image caption सरकार का कहना है कि मेक इन इंडिया के लिए विदेशी निवेश चाहिए.

क्षेत्रीय एयरलाइनों में भी 49 फ़ीसदी विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है.

रक्षा क्षेत्र और समाचार चैनलों में 49 फ़ीसदी विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है जबकि ग़ैर-न्यूज़ चैनलों में सौ प्रतिशत विदेशी निवेश किया जा सकेगा.

आर्थिक उदारीकरण के ऐलान के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए वित्त अरुण जेटली ने कहा, "पिछले एक महीनों में भारत में व्यवसाय करना सरल हो इसको लेकर देश की छवि बदली है. पहले वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम और फिर विश्व बैंक ने भारत की रेटिंग ऊपर बताई है."

वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले एक साल में विदेशी निवेश चालीस फ़ीसदी बढ़ा है.

उन्होंने कहा, "भारत को निवेश के लिए पूंजी की आवश्यक्ता है. जब निवेश होगा तब ही व्यवसाय और रोज़गार बढ़ पाएंगे."

उन्होंने कहा, "मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों के लिए निवेश की ज़रूरत है."

अरुण जेटली ने इस बात को मानने से इंकार किया कि ये फ़ैसला बिहार चुनावों के बाद लिया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसे फ़ैसले 48 घंटों में नहीं लिए जाते हैं.

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