वन रैंक वन पेंशन: सैनिकों ने पदक लौटाने शुरु किए

मेडल लौटाते पूर्व सैनिक

'एक पद एक पेंशन' की मांग कर रहे सेना के सेवानिवृत अधिकारियों ने सरकार की अधिसूचना से असंतोष जताते हुए अपने मेडल वापस करने का सिलसिला शुरू कर दिया है.

देश भर के विभिन्न ज़िलों में पूर्व सैनिकों ने ज़िले के मुख्यालयों पर अपने युद्ध व अन्य वीरता मेडल लौटाने शुरु कर दिए हैं.

दिल्ली में भी पूर्व सैनिकों ने दोपहर बाद मेडल लौटाने शुरू कर दिए. इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर लगाए गए एक कैंप में लगभग 10 हज़ार के क़रीब मेडल लौटाए गए.

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रिटायर्ड जनरल सतबीर ने कहा कि सरकार की अधिसूचना के बाद सभी पूर्व सैनिक ठगा महसूस कर रहे हैं.

दिल्ली में अपने मेडल लौटाने आये जनरल चढ्ढा ने कहा, "सरकार ने पिछले साल जुलाई से ही ओआरओपी के मामले को लटका रखा है. ये उन लोगों का अपमान है जिन्होंने अपनी ज़िंदगी देश की सरहदों की रक्षा के लिए समर्पित कर दी."

मेडल लौटाने वालों में से एक थे कर्नल अनिल कॉल जिनका एक हाथ और एक आँख युद्ध के दौरान गोली लगने से खराब हो गए.

कर्नल कॉल कहते हैं कि उन्होंने अपनी जान की बाज़ी तक लगा दी, मगर उन्हें पेंशन तक ठीक से नहीं मिल रही है. वे कहते हैं, "इससे बड़ा दुर्भाग्य मेरे लिए क्या होगा ?"

आंदोलनकारियों के नेता जनरल सतबीर ने बीबीसी से कहा. "एक फौजी के लिए उसके मेडल ही सबकुछ हैं. उसे मेडल खैरात में नहीं मिलते बल्कि उन्हें हासिल करने के लिए उसे अपनी जान की बाज़ी लगानी पड़ती है. आज हम बड़े भारी मन से अपने मेडल वापस कर रहे हैं. आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ऐसा करते हुए हम पर क्या बीत रही होगी".

अधिसूचना में कुछ अवधि बाद पेशन की समीक्षा और इसे समान किए जाने की बात कही गयी है. सरकार ने इसके लिए एक आयोग के गठन की बात भी कही है.

मगर आंदोलन कर रहे पूर्व सैनिक इससे संतुष्ट नहीं हैं. उनका आरोप है कि सरकार ने ओआरओपी में कई पेंच फंसा दिए हैं जो पूरी प्रक्रिया को काफी जटिल बना देते हैं.

उधर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का कहना था कि पूर्व सैनिकों की सारी मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता है.

उनका कहना था कि लोकतंत्र में सभी को मांग करने का अधिकार है मगर सारी मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता है.

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