भाजपा में बुज़ुर्गों की इज़्ज़त नहीं: गोविंदाचार्य

विचारक और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नेता गोविंदाचार्य का कहना है कि पार्टी में बुज़ुर्ग नेताओं को सम्मान नहीं मिल रहा है.

बीबीसी से बातचीत में गोविंदाचार्य ने कहा है कि वरिष्ठ नेताओं के मन में जो बात आई है, वो ठीक नहीं है. इससे पता चलता है कि परिवार में बड़ों को जो सम्मान मिलना चाहिए वो नहीं मिल रहा है और परिवार में भावना की कमी है.

बिहार के हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और शांता कुमार जैसे चार वरिष्ठ नेताओं ने बयान जारी कर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाया और हार की समीक्षा करने को कहा.

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गोविंदाचार्य ने कहा, "अगर घर की बात बाहर आ रही है तो लगता है कि घर में बातचीत की कमी है."

गोविंदाचार्य ने इन अफ़वाहों को ख़ारिज किया है कि उनके ही कहने पर ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने साझा बयान जारी किया.

गोविंदाचार्य ने कहा कि वो दिवाली के मौक़े पर आशीर्वाद लेने के लिए मुरली मनोहर जोशी के घर गए थे, और वहां पहुचने के बाद ही उन्हें पता चला की कोई साझा बयान आने वाला है.

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आरएसएस की भूमिका पर गोविंदाचार्य का मानना है कि संघ के लोग परिवार के बड़े हैं. संघ का कर्तव्य है कि परिवार की बातों को समझाने में एक-दूसरे की मदद करें और ज़रूरत पड़ने पर इसके लिए पहल करें.

मौजूदा राजनीतिक माहौल पर गोविंदाचार्य का कहना है कि असहिष्णुता के मामले में भावना का भी ख़्याल रखा जाना चाहिए और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे या पूर्वजों का अपमान हो तो उसे सह जाना सहिष्णुता नहीं है.

गोविंदाचार्य का कहना है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने जो कहा यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है. लेकिन इस बात को चीख़- चीख़कर कहने की ज़रूरत नहीं थी. इससे भी लोगों की भावनाओं को ठेस लगती है और केवल एक पक्ष को असहिष्णु नहीं कहा जा सकता.

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हाल में सिद्धरमैया ने कहा कि वो बीफ़ नहीं खाते, लेकिन अब खाएंगे. इसके बाद उन्हें धमकियां मिलीं.

गोविंदाचार्य का कहना है कि किसी एक वर्ग का अपमान करें, फिर उसे सहिष्णु होने के लिए कहें तो ये ठीक नहीं है.

हालांकि गोविंदाचार्य कहते हैं कि किसी के चेहरे पर स्याही पोत देना भी अच्छी बात नहीं है, काग़ज़ की लड़ाई काग़ज़ से होनी चाहिए.

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