पांच बिंदुओं में समझें भारत-ब्रिटेन संबंध

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन दौरे पर हैं. इस दौरान राजनीतिक और आर्थिक विषयों के अलावा कई दूसरे द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हो रही है.

आइए जानते हैं भारत-ब्रिटेन संबंधों को इन पांच बिंदुओं में:

1. आर्थिक क्षेत्र

ब्रिटेन भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है.

जबकि भारत भी ब्रिटेन में नई परियोजनाएं शुरू करने के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश है. भारत से पहले केवल अमरीका और फ़्रांस ही हैं.

भारत के लिए ब्रिटेन एक महत्वपूर्ण आयातक देश है. हालांकि यह भारत को बहुत बड़ी मात्रा में निर्यात भी करता रहा है, लेकिन हाल के दिनों में इसमें कमी आई है.

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में भारत की कंपनियों की अहम भूमिका है. भारतीयों की 800 से ज़्यादा कंपनियों ने ब्रिटेन में 1 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार दिया है.

केवल टाटा ग्रुप की कंपनियों ने ब्रिटेन में 65 हज़ार लोगों को रोज़गार दिया है.

हालांकि आंकड़ों की हकीकत पता कर पाना मुश्किल है लेकिन विश्व बैंक के आंकड़ों के आधार पर 2013 के 'द गार्डियन' अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, करीब 3.9 अरब डॉलर रकम ब्रिटेन से भारत आई थी. इसमें औपचारिक और अनौपचारिक दोनों ही लेन-देन शामिल हैं.

2. शिक्षा

भारत के 21 हज़ार से ज़्यादा छात्र ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे हैं.

हालांकि भारत के युवाओं में अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी में पढ़ाई, नौकरी या निवेश करने का चलन बढ़ा है.

विज्ञान के क्षेत्र में न्यूटन-भाभा फ़ंड जैसी नई पहल से शोध के क्षेत्र में संबंध मज़बूत होंगे.

3. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन की स्थिति

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भारत ने 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण अपनाया था. उसके बाद ब्रिटेन को भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बचाने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है.

पंद्रह साल पहले तक ब्रिटेन भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी था. लेकिन अब वह बारहवें नंबर पर पहुंच गया है.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अठारह महीने के कार्यकाल में 27 से ज़्यादा देशों की यात्रा की है. इसमें आपसी संबंधों को बेहतर करने के साथ ही नए व्यापारिक समझौते भी हुए हैं.

भारत की 'लुक ईस्ट पॉलिसी' ने भी जापान, चीन और कोरिया जैसे देशों का महत्व बढ़ाया है.

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इसी साल मोदी की चीन यात्रा के दौरान करीब 22 अरब डॉलर के समझौते किए गए.

हाल ही में पचास अफ़्रीकी देशों के साथ हुए सम्मेलन में आर्थिक संबंधों को बेहतर करने पर चर्चा की गई.

4. सांस्कृतिक संबंध

भारत और ब्रिटेन के बीच 200 साल से भी अधिक पुराना संबंध है. दोनों ही देश सांस्कृतिक संस्थानों और अंग्रेज़ी से माध्यम से जुड़े हैं.

दोनों देशों के आपसी संबंधों को मज़बूत रखने में ब्रिटेन में रहने वाले करीब 15 लाख प्रवासी भारतीयों की अहम भूमिका है.

ये प्रवासी भारतीय न केवल ब्रिटेन और भारत के बीच एक पुल का काम कर रहे हैं बल्कि इन्होंने भारत की संस्कृति से ब्रिटेन को संपन्न भी किया है.

5. प्रवासी भारतीयों की भूमिका

प्रवासी भारतीय ब्रिटेन में हर क्षेत्र में मौजूद है. अब चाहे वो व्यापार, राजनीति, खेल का क्षेत्र हो या कोई और, इन्होंने सबमें एक मुक़ाम हासिल किया है.

एक खास बात यह भी है कि ब्रिटेन ने आपसी संबंधों को बेहतर करने लिए ज़्यादातर प्रवासी भारतीयों को ही सामने रखा है.

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ब्रितानी काउंसिल के हाल के सर्वेक्षण के मुताबिक़ भारत के मध्यम वर्ग के युवाओं से कह गया कि दुनिया की 15 बड़ी अर्थव्यवस्था को चुनें तो उन्हें अमरीका के बाद ब्रिटेन सबसे ज़्यादा आकर्षक लगा.

जाहिर है शिक्षा और संस्कृति भारत और ब्रिटेन के भावी संबंधों को मज़बूत बनाए रख सकता है.

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