डायन होने के शक में युवक को मार डाला

असम में डायन होने के शक में चाय जनजाति के एक आदिवासी युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई जबकि युवक का एक अन्य साथी और परिवार के सदस्यों ने किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचाई.

अंधविश्वास में डूबे ग्रामीणों ने 25 वर्षीय उज्जल हजाम को इतनी बेरहमी से पीटा कि उनकी मौक़े पर ही मौत हो गई. हत्या के बाद भीड़ ने युवक के घर को भी तहस नहस कर दिया. घटना कछार ज़िले के लखीपुर थाना क्षेत्र के आदिवासी बहुल दिलख़ुश चाय बागान की है.

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पुलिस ने बताया कि ये घटना गुरुवार देर रात की है और उस समय उज्जल हजाम अपने एक साथी के साथ घर पर काली पूजा कर रहा था. जैसे ही पूजा करने की ख़बर गांव के लोगों को मिली वहां क़रीब दो हज़ार से अधिक ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई. भीड़ ने उनपर हमला बोल दिया. इस घटना के सिलसिले में अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

असम विधानसभा में इसी साल पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 से अब तक डायन हत्या के नाम पर हुई घटनाओं में राज्य भर में 77 लोगों की हत्या हो चुकी है और यह सिलसिला अब भी जारी है. इनमें से 90 फ़ीसदी मामले महिलाओं के ख़िलाफ़ हैं.

मृतक के पिता शिवशंकर हजाम ने लखीपुर थाने में एक मामला दर्ज कराया है. पुलिस दावा कर रही है कि घटना में शामिल कुछ लोगों की शिनाख़्त की गई है और उन्हें तलाशा जा रहा है.

कछार ज़िले के पुलिस अधीक्षक राजवीर सिंह ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि दो युवकों पर जादू टोना के नाम पर लड़कियों के साथ ग़लत व्यवहार करने की बात गांव वालों से सुनी है. घटना चाय बागान इलाक़े की है और यह पूरी तरह डायन हत्या से जुड़ा मामला है.

उनके अनुसार इस घटना मे क़रीब पूरा गांव ही शामिल था. उन्होनें कहा कि अभी तक कोई गिरफ़्तार नहीं हुआ है. पुलिस ने इस तरह की घटना के कारण को शिक्षा का अभाव बताया है.

वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि उज्जल हजाम और मनमोहन भक्त नामक दो युवक जादू टोना कर लोगों को नुक़सान पहुंचाते आ रहे थे. आरोप ये भी है कि जिन लड़कियों की शादी नहीं हो रही थी, उनकी शादी जल्द करवाने के नाम पर दोनों युवक गांव की कुछ लड़कियों का शारीरिक शोषण भी कर रहें थे. गांव वालों ने उन्हें कई बार चेतावनी भी दी थी.

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि उनके तंत्र-मंत्र के कारण पिछले कुछ समय से गांव में कई शिशुओं की मौत हो चुकी है. इलाक़े में इस तरह की घटनाओं पर नज़र रखने वाले दिलीप कुमार सिंह कहते है कि यह काफ़ी पिछड़ा इलाक़ा है.

दिलीप के अनुसार, ''यहां के लोगों के पास न तो शिक्षा है और न खाने के लिए पौष्टिक आहार है. ऐसे में लगातार बीमार पड़ने वाले लोग इन तंत्र-मंत्र वालों के चक्कर में आ जाते है. राज्य सरकार ने नया क़ानून बनाया है, लेकिन जबतक ये लोग अच्छी तरह से शिक्षित नहीं होंगे, इनसब के लिए काला अक्षर भैंस बराबर है. वहीं डायन हत्या से जुड़े अंधविश्वास को ख़त्म करने के लिए जिस स्तर के जागरूकता अभियान की ज़रूरत है, वैसा किसी भी पक्ष की तरफ़ से देखने को नहीं मिला है.''

असम में डायन हत्या से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी के बाद राज्य सरकार ने एक नया क़ानून ज़रूर बना दिया है लेकिन अभी इस क़ानून को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का काम बाक़ी है.

इस तरह के मामलों में जागरुकता लाने के लिए काम कर रहें लोगों का कहना है कि केवल कड़े क़ानून से इस समस्या को ख़त्म नहीं किया जा सकता.

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जागरुकता पैदा करने के लिए असम में बड़ा आंदोलन खड़ा करने वाली बीरूबाला राभा कहती हैं कि ऐसी घटना होते ही वह अपने मिशन के लोगों के ज़रिए प्रशासन को अवगत कराती है.

बीरूबाला कहती है, ''एसपी और डीसी को घटना में शामिल लोगों को गिरफ़्तार करने को कहा जाता है, ताकि ऐसी घटना को अंजाम देने वाले लोगों में भय उत्पन्न हो. इन दिनों बीरूबाला डायन हत्या पर जगह जगह जा कर नुक्कड़ नाटक कर रहीं है ताकि लोगों में जागरूकता फैले.''

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