#100Women खेल के चमकते सितारे (भाग-3)

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#100Women में बीबीसी हिंदी ने चुनी हैं भारत की वो 100 दमदार औरतें, जिन्होंने नियम बदले, नए रास्ते खोले और मिसाल कायम कर दी, नहीं तो कम से कम समाज को झकझोरा तो है ही.

इस सिरीज़ में विभिन्न खेलों में कामयाबी का इतिहास रचने वाली 10 महिलाएं.

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  • 100Women: Sport

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  • आरांचा सांचेज़

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    महाराष्ट्र की 25 साल की आरांचा सांचेज़ स्नूकर और बिलियर्ड्स की विश्व चैंपियन हैं.

    आरांचा दो इंटरनेशनल गोल्ड मेडल और दस नेशनल टाइटल्स जीत चुकी हैं.

    ये कामयाबी उन्होंने तब हासिल की है जब वह आंखों की मुश्किल बीमारी से पीड़ित हैं.

    इस वजह से उनकी आंखों किसी चीज़ पर फोकस नहीं कर पातीं.

    सितंबर 2015 में उन्होंने एडिलेड में बिलियर्ड्स का वर्ल्ड वीमेन चैंपियनशिप ख़िताब जीता.

    वह बिलियर्ड्स और स्नूकर के वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली दुनिया की पहली महिला खिलाड़ी हैं.

    महाराष्ट्र के सर्वोच्च खेल सम्मान शिव छत्रपति सम्मान से सम्मानित आरांचा एमबीए (फ़ाइनेंस) करने के बाद इन दिनों 'क्रेडिट सुइस' में काम कर रही हैं.

  • अर्चना सरदाना

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    अर्चना सरदाना भारत की पहली और इकलौती महिला 'बेस जंपर' हैं.

    दो बच्चों की मां अर्चना दुनिया की अलग अलग जगहों पर अब तक 335 बार स्काई डाइविंग कर चुकी हैं.

    उनका नाम 2011 में 'लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स' में दर्ज हो चुका है.

    वे 13,500 फ़ीट की ऊंचाई से 'फ्री फाल स्काई डाइविंग' कर चुकी हैं.

    अमरीका के यूटाह स्थित 400 मीटर ऊंचे पुल से बेस जंपिंग, मलेशिया के मशहूर केएल टावर्स से राष्ट्रीय झंडे के साथ जंपिंग और समुद्र में 30 मीटर की गहराई तक राष्ट्रीय झंडे के साथ डाइविंग इसमें शामिल है.

    ये सब कारनामे अर्चना ने शादी के बाद किए हैं. वो दिल्ली में स्कूबा डाइविंग अकादमी भी चलाती हैं.

  • द्युति चंद

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    19 साल की द्युति चंद भारत की ऐसी एथलीट हैं जिन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए स्विट्ज़रलैंड स्थित 'कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स' में अपनी लैंगिक पहचान की लड़ाई लड़नी पड़ी.

    2014 में 'अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ' ने द्युति के शरीर में टेस्टोस्ट्रॉन (पुरुष हार्मोंस) की मात्रा अधिक होने के चलते पाबंदी लगा दी थी.

    इस वजह से वह 2014 के राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले पाईं.

    द्युति की जीत और पाबंदी का हटना दुनियाभर में मिसाल है.

    उड़ीसा के एक गरीब बुनकर परिवार की द्युती ने 2013 में रांची में हुए 'नेशनल सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप' में 11.73 सेकेंड के समय के साथ 100 मीटर और 23.73 सेकेंड समय के साथ 200 मीटर की रेस जीतने का करिश्मा दिखाया था.

  • गीता फोगाट

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    गीता फोगाट 2012 में ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफ़ाई करने वाली भारत की पहली पहलवान बनीं. हालांकि लंदन ओलंपिक में वह कोई पदक नहीं जीत पाईं.

    गीता को पहली कामयाबी नई दिल्ली के 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में 55 किलोग्राम वर्ग फ्रीस्टाइल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर मिली.

    यह महिला कुश्ती में भारत का पहला स्वर्ण पदक है. गीता ने 2012 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता.

    2012 और 2015 की एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भी गीता कांस्य पदक जीत चुकी हैं.

    हरियाणा के भिवानी ज़िले की गीता के जीवन पर बॉलीवुड में 'दंगल' नाम से फ़िल्म बन रही है, जिसमें आमिर ख़ान मुख्य भूमिका निभा रहे हैं.

  • मेरी कॉम

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    32 वर्षीय मांग्ते चुंगनेज़ियांग मेरी कॉम मुक्केबाज़ी की पांच बार की विश्व चैंपियन हैं जबकि चार बार वो एशियन चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.

    2012 में लंदन ओलंपिक में जब महिला मुक्केबाज़ी प्रतियोगिता को शामिल किया गया तो वो वहां कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज़ बनीं थीं.

    मेरी को पद्म भूषण, अर्जुन अवॉर्ड और राजीव गांधी खेल रत्न समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया हैं.

    तीन बच्चों की मां, मेरी के जीवन पर एक बॉलीवुड फ़िल्म बनी है जिसमें प्रियंका चोपड़ा ने उनका किरदार निभाया है.

    बॉक्सिंग को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने साल 2006 में इंफ़ाल में एक बॉक्सिंग अकादमी स्थापित की है.

  • प्रीति श्रीनिवासन

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    महज़ आठ साल की उम्र में तमिलनाडु क्रिकेट का सितारा बन गईं थीं प्रीति श्रीनिवासन.

    राज्य क्रिकेट टीम में इतनी कम उम्र में जगह बनाने का रिकॉर्ड अब तक उनके नाम है.

    अंडर 19 क्रिकेट में तमिलनाडु ने प्रीति की कप्तानी में 1997 में राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट जीता था.

    लेकिन एक हादसे में उनकी स्पाइनल कार्ड की हड्डी टूट गई और गले के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया.

    प्रीति हमेशा के लिए व्हील चेयर पर आ गईं पर उनका हौसला कायम रहा.

    हादसे के बाद प्रीति ने सोलफ्री चैरेटिबल ट्रस्ट शुरू किया.

    36 साल की प्रीति की संस्था विकलांग महिलाओं के कल्याण के लिए कई कार्यक्रम भी चलाती है.

  • सबीहा नबी

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    20 साल की सबीहा नबी भारत की उभरती हुई स्कीईंग चैंपियन हैं.

    2013 में उत्तराखंड में राष्ट्रीय ऐल्पाइन स्कीईंग चैंपियनशिप में सबीहा ने तीसरा स्थान हासिल किया.

    इससे पहले भी सबीहा राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.

    स्नातक की पढ़ाई कर रहीं सबीहा को 2013 में स्कीईंग के अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबले में भाग लेने का मौक़ा भी मिला था, लेकिन पासपोर्ट नहीं होने की वजह से वह जा नहीं पाईं.

    इससे पहले सबीहा ने गुलमर्ग में आयोजित 'नेशनल जूनियर स्कीईंग चैंपियनशिप' में दो गोल्ड मेडल जीते थे.

    भारत प्रशासित कश्मीर के ज़िला बारामूला के तंगमर्ग इलाके की सबीहा का सपना अब ओलंपिक खेलों में क्वालिफ़ाई करना है.

  • साइना नेहवाल

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    25 वर्षीय साइना नेहवाल ओलंपिक खेलों में बैडमिंटन में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं.

    2012 में उन्होंने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता. 'बैडमिंटन वर्ल्ड फ़ेडरेशन' (बीडब्लूएफ़) की रैंकिंग में 2015 में साइना दुनिया के शीर्ष पायदान पर पहुंच चुकी हैं.

    इसी साल वह 'वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप' के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी भी बनीं.

    महज़ 16 साल की उम्र में साइना ने 2006 के कॉमनवेल्थ खेलों में कांस्य पदक जीता था.

    इसके बाद उन्होंने 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण और 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में रजत पदक भी जीता.

    उन्हें देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार, राजीव गांधी खेल रत्न से भी सम्मानित किया गया है.

  • सानिया मिर्ज़ा

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    28 साल की सानिया मिर्ज़ा महिला डबल्स में दुनिया की नंबर एक टेनिस खिलाड़ी हैं.

    2015 में उन्होंने अपनी जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ मिलकर विंबलडन, और अमरीकी ओपन में महिला डबल्स का ख़िताब जीता है.

    सानिया ने 15 साल की उम्र में पहली बार 2002 में एशियाई खेलों में लिएंडर पेस के साथ मिक्स्ड डबल्स में कांस्य पदक जीता.

    इसके बाद 2003 में सानिया डब्ल्यूटीए टूर में शामिल हुईं. सिंगल्स इवेंट में सानिया 27वें पायदान तक पहुंचने में कामयाब रहीं.

    लेकिन चोट की वजह से जल्दी ही उन्होंने अपना ध्यान डबल्स पर लगाना शुरू कर दिया.

    सानिया को 2015 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाज़ा गया.

    उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है.

  • ताशी मलिक, नुंग्शी मलिक

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    ताशी और नुंग्शी मलिक कमाल की जुड़वां बहनें हैं.

    ये पहली जुड़वां बहनें हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट की सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की.

    इसके चलते ‘गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में इनके नाम दर्ज है.

    इतना ही नहीं दोनों ‘एडवेंचर्स ग्रैंड स्लैम’ पूरा कर चुकी हैं.

    यानी दुनिया के हर महादेश की सबसे ऊंची चोटी को फ़तह करने के साथ मलिक बहनों ने उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने का कारनामा दिखाया है.

    ऐसा कारनामा दिखाने वाली ये दुनिया की सबसे कम उम्र की एथलीट है.

    24 साल की मलिक बहनें इस मुकाम तक पहुंचने वाली दक्षिण एशिया की पहली एथलीट भी हैं.

    उत्तराखंड सरकार ने इन दोनों बहनों को ‘बेटी बचाओ’ अभियान का ब्रैंड एंबैसडर बनाया.

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