गांधी मैदान में दिखेगी भाजपा विरोधी ताक़त!

नीतीश कुमार इमेज कॉपीरइट Sanjay Kumar

बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में जिन लोगों को बुलाया गया है वो सभी विपक्ष के लोग या ऐसे लोग हैं जो भाजपा या नरेंद्र मोदी से असहमति रखते हैं, जैसे शिवसेना.

पटना के गांधी मैदान में शुक्रवार को शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हो रहा है.

लेकिन एक बात तो साफ है कि बिहार का चुनाव जीतने के बाद विपक्ष की राजनीति के केंद्र में नीतीश कुमार आ गए हैं और इस आयोजन के जरिए ये बताना चाहते हैं कि 2019 का आम चुनाव किनके बीच होने जा रहा है, यानी एक तरफ़ नरेंद्र मोदी हैं तो दूसरी तरफ़ नीतीश कुमार हैं.

महागठबंधन की पूरी कोशिश है कि वो राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के एक विकल्प के रूप में उभरे.

अगर इस समारोह में आमंत्रित लोगों को देखें तो उत्तर पूर्व से लेकर जम्मू कश्मीर और केरल तक के राजनेता शामिल हो रहे हैं.

केरल सरकार के एक मंत्री आ रहे हैं, बंगाल की मुख्यमंत्री आ चुकी हैं, उड़ीसा के मुख्यमंत्री भी आमंत्रित हैं हालांकि उन्होंने आने में असमर्थता जाहिर की है. कर्नाटक, त्रिपुरा, असम, हिमाचल, दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के अलावा उमर अब्दुल्लाह और फ़ारुख अब्दुल्लाह आ रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP. Facebook pages of Nitish Kumar and Lalu Yadav

देश के कई बड़े नेता इकट्ठे हो रहे हैं. इसका संदेश बहुत साफ है कि अब जो लड़ाई होगी उसमें देश की राजनीति जिन दो हिस्सों में बंटेगी उसमें एक तरफ़ भाजपा यानी एनडीए और दूसरी तरफ़ महागठबंधन जिसके नेता नीतीश कुमार हैं.

पिछले आम चुनावों के बाद से लेकर बिहार चुनावों तक विपक्ष बहुत निष्प्रभावी था लेकिन अब गोलबंदी शुरू हो रही है और इस संसद सत्र में वो पूरी ऊर्जा के साथ दिखाई देगा.

नीतीश कुमार की भी ये कोशिश है कि देश में भाजपा विरोध की वो धुरी बनें.

हालांकि इस गोलबंदी के केंद्र में सेक्युलरिज़्म एक मुद्दा है लेकिन इस पूरे जुटान के पीछे का मक़सद भाजपा विरोध को मजबूत करना, जैसे कुछ साल पहले तक कांग्रेस के ख़िलाफ़ गोलबंदी हुआ करती थी.

एक साल पहले तक जो लग रहा था कि अब दस साल के लिए भाजपा को हिला पाना मुश्किल, इस चुनाव के बाद अब लोग दूसरी बात भी सोचने लगे हैं.

ये बातें उन राजनीतिक दलों को भी समझ में आने लगीं हैं, जो पहले बहुत ही हताश या निराश थीं. बिहार चुनाव के बाद उनकी हताशा गायब हो गई है और उत्साह आ गया है.

हालांकि इस विपक्षी गोलबंदी के पीछे कोई बहुत सैद्धांतिक उसूल नहीं काम कर रहे हैं क्योंकि इन्हीं में से कई लोगों ने कभी भाजपा का साथ दिया था.

जहां तक समाजवादी पार्टी की बात है तो ऐसी सूचना है कि इसमें मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आ रहे हैं. शिवपाल यादव के भी आने की ख़बर है.

हालांकि बिहार चुनावों में मुलायम सिंह ने तीसरा मोर्चा बना लिया और महागठबंधन के ख़िलाफ़ बयान दिए लेकिन अब जब चुनाव बीत चुका है तो मुलायम सिंह की मजबूरी है ऐसी किसी गोलबंदी में शामिल होना.

क्योंकि उनका आधार वोटर इस बात की इजाजत नहीं देता है कि वो भाजपा के साथ जाएं.

(वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी के साथ रोहित जोशी की बातचीत के आधार पर)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार