चकमा देने वाला नरभक्षी बाघ आख़िरकार हुआ ढेर

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Image caption फ़ाइल फ़ोटो

कर्नाटक के बांदीपुर वन प्रभाग में गुरुवार को एक नरभक्षी बाघ को मार दिया गया. इस बाघ ने कुछ दिन पहले ही एक किसान पर हमला कर उसे खाया था.

गुरुवार शाम भारतीय समयानुसार करीब 3.30 बजे यह बाघ नाटकीय घटनाक्रम के तहत मारा गया. एक वनरक्षक शिव कुमार एक भैंस के कटड़े को चारे के रूप में एक पेड़ के पास बांध रहे थे, जब बाघ वहां पहुंच गया.

कर्नाटक के मुख्य वन्यजीव सरंक्षक रवि राल्फ़ ने बताया, "शिव कुमार कटड़े को बांध रहे थे कि उन्हें बाघ की गुर्राहट सुनाई दी, फिर वन रक्षक की चीख़ निकली और तभी निशानेबाज़, सुशील कुमार ने बाघ को गोली मार दी."

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इस बाघ ने तीन दिन पहले मैसूर के निकट हेदियाला जंगल में 55 साल के शिवन्ना को मार दिया था और उनके शव के कुछ हिस्सों को खा गया था. इसने एक महीना पहले भी एक आदमी को मारा था.

कर्नाटक के प्रिंसिपल चीफ़ कंजरवेटर, फ़ॉरेस्ट विनय लूथरा ने कहा, "जब उसने किसान की लाश को थोड़ा खा लिया तो हमने उसे नरभक्षी घोषित कर दिया."

बुधवार को वन विभाग के 60 कर्मचारियों और विशेष बाघ सरंक्षण बल के कर्मचारियों ने उस स्थान पर चारे के रूप में एक बकरी को बांधा था, जहां शिवन्ना मारे गए थे क्योंकि बाघ शिकार की जगह लौटकर आते हैं.

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बाघ वहां पहुंचा लेकिन वह उम्मीद से ज़्यादा चालाक निकला. वह बकरी को छोड़कर भाग गया. हालांकि वह अपने पंजों के निशान छोड़ गया जिसके बाद गोलियों और ट्रैंक्वेलाइज़र्स से लैस वन विभाग के अधिकारी तीन किलोमीटर के दायरे में सतर्कता के साथ फैल गए.

राल्फ़ बताते हैं, "सुशील ठीक मेरे और मेरे एक वरिष्ठ साथी के पीछे था, जब हमें गुर्राहट सुनाई दी. उन्होंने दूसरे प्रयास में नरभक्षी को मारा क्योंकि उन्हें शिव कुमार को बचाना था."

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लूथरा ने बताया, "सुशील कुमार एक प्राइवेट निशानेबाज़ हैं जिन्हें नरभक्षी को मारने के लिए लाया गया था. राष्ट्रीय बाघ सरंक्षण अथॉरिटी (एनटीसीए) का नियम है कि बाघ को एक ही गोली से मारा जाना चाहिए. सुशील कुमार के पास जो बंदूक है उससे यह किया जा सकता है."

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