हरीश रावत ने गोहत्या वाले बयान से इंकार किया

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने गोहत्या करने वालों को राष्ट्रद्रोही कहा है.

बीबीसी से बात करते हुए हरीश रावत ने कहा, ''सुनियोजित साज़िश करके इस ख़बर को प्लांट किया है. इसमें कुछ भी सच नहीं है.''

ये पूछने पर कि इसकी वजह क्या हो सकती है, उन्होंने कहा, "मैं और वीरभद्र सिंह जी ही रह गए हैं, इसलिए इन दो विकटों पर ही ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं. लेकिन ये सब आधारहीन है. इसमें कोई सच नहीं है."

गोहत्या करने वाले के प्रति आपका क्या रवैया होगा इस सवाल पर हरीश रावत ने कहा, "हमारे राज्य में इसके लिए एक क़ानून है और जब तक वो क़ानून है हम उससे बंधे हुए हैं. वह क़ानून गोहत्या को प्रतिबंधित तो करता है लेकिन इसे देशद्रोह नहीं कहता. न ही ये कहता है कि ऐसा करने वाले को उत्तराखंड में रहने का कोई अधिकार नहीं है."

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Image caption गौहत्या करने वाला देशद्रोही है-इस बयान से इंकार किया हरीश रावत ने

हरीश रावत ने कहा, "उस क़ानून का नाम गोहत्या प्रतिबंध क़ानून नहीं है बल्कि गौ संरक्षण क़ानून है. और ये क़ानून भी बीजेपी सरकार ने बनाया है और हमने उस क़ानून को हटाया नहीं है क्योंकि ये क़ानून गायों के संरक्षण की बात कहता है. हम भी गायों को बचाते हैं. सरकार की ओर से विधवा औरतों को गाय देते हैं. हम गाय के दूध पर चार रुपये प्रति लीटर बोनस देते हैं क्योंकि ये हमारी अर्थव्यवस्था का हिस्सा है."

एक रिपोर्ट के मुताबिक़ शुक्रवार को हरिद्वार में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रावत ने कहा था कि जो लोग गोहत्या करते हैं वे राष्ट्रद्रोही हैं और उनको देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है.

रावत कहते हैं, "मैंने ऐसा कोई बयान ही नहीं दिया है. मैं इस तरह का बेवक़ूफ़ी भरा बयान दे ही नहीं सकता हूँ."

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