चार महिला माओवादियों को मारने का दावा

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छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में पुलिस ने एक कथित मुठभेड़ में चार महिला माओवादियों के मारे जाने का दावा किया है.

पुलिस का कहना है कि इस मुठभेड़ में माओवादी कमांडर आयतू को भी गोली लगी है.

पुलिस के मुताबिक़ नागलगुड़ा के पास उन्हें माओवादियों की मलांगीर एरिया कमिटी का कैंप चलने की सूचना मिली और पुलिस मौक़े पर पहुंची, जहां माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई.

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अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नक्सल ऑपरेशन आरके विज के अनुसार “पुलिस और सुरक्षाबलों का एक संयुक्त दल माओवादी ऑपरेशन के लिये निकला था. गादीरस थाने में दंतेवाड़ा और सुकमा की सीमा पर नागलगुड़ा पहाड़ के पास माओवादियों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हो गई.”

इस कथित मुठभेड़ के बाद पुलिस ने चार वर्दीधारी महिला माओवादियों का शव बरामद करने की बात कही है.

पुलिस का दावा है कि मौक़े से पुलिस ने कई हथियार और भारी मात्रा में दैनिक उपयोग की सामग्री भी बरामद की है.

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पुलिस ने कहा है कि इस मुठभेड़ में दरभा इलाक़े के कमांडर आयतू को भी गोली लगी है, लेकिन वे मौक़े से भागने में कामयाब रहे.

आयतू को बस्तर के इलाक़े में हुई कई हिंसक घटनाओं के लिये जिम्मेदार माना जाता है.

एक अलग घटना में बीजापुर ज़िले के चेरपाल में सुरक्षाबलों के कैंप पर माओवादियों की गोलीबारी की खबर है. इसके अलावा माओवादियों ने गंगालूर मार्ग को काट कर आवागमन में बाधा डाली है.

चेरपाल में सुरक्षाबल के जवानों के सरकारी आश्रमशाला के एक बच्चे के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद माओवादियों ने आश्रमशाला को बंद करने की घोषणा की है.

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माओवादियों ने मारपीट में शामिल जवानों को निलंबित करने की मांग की है. इस घटना के बाद से आश्रमशाला के सैकड़ों छात्र अपने गांव लौट गये हैं.

दूसरी ओर माओवादियों की दंडकारण्य ज़ोनल कमेटी ने एक बयान जारी कर 25 नवंबर को माओवादियों पर हवाई हमलों के ख़िलाफ़ बंद का आह्वान किया है.

अपने बयान में समिति ने आरोप लगाया है कि सरकार बस्तर क्षेत्र की संपदा को उद्योगपतियों के हवाले करने के लिए माओवादियों के संघर्ष को ख़त्म करने पर आमदा है.

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