लड़के-लड़कियों के अलग खेल क्यों?

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भारत की उड़नपरी कही जाने वाली पीटी उषा ने स्कूल गेम्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसजीएफ़आई) पर लैंगिक भेदभाव का आरोप लगाया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है.

उन्होंने एसजीएफ़आई पर आरोप लगाया कि फ़ेडरेशन ने सिफ़ारिश की है कि लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग खेल आयोजन रखे जाएं.

एसजीएफ़आई ने जनवरी के दूसरे हफ़्ते में नासिक में लड़कों के लिए एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं रखी हैं और दिसंबर के चौथे हफ़्ते में पुणे में लड़कियों के लिए प्रतियोगिताएं रखी हैं.

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पीटी उषा ने बीबीसी हिंदी को बताया, "साठ साल में ऐसा कभी नहीं हुआ. अब क्यों हो रहा है? पुणे में कैसे बुनियादी सुविधाओं की कमी हो सकती है? पुणे देश के सर्वोत्तम केंद्रों में है. मैंने कभी महिला और पुरुषों के अलग ओलंपिक के बारे में नहीं सुना."

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम लिखी उनकी चिट्ठी में लिखा है, "जब पूरी दुनिया लैंगिक भेदभाव के ख़िलाफ़ ज़ोर-शोर से आवाज़ उठा रही है और औरत-मर्द के बीच बराबरी की बात कर रही है, तब ऐसे वक़्त में एसजीएफ़आई के इस रवैये को किसी भी क़ीमत पर न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता."

लेकिन इस मामले पर एसजीएफ़आई का कुछ और ही कहना है.

फ़ेडरेशन सचिव जनरल राजेश कुमार मिश्रा के मुताबिक़, "निश्चित तौर पर किसी भी तरह का कोई लैंगिक भेदभाव नहीं हो रहा है. सालाना आम बैठक (एजीएम) के दौरान हर राज्य से राष्ट्रीय खेल के आयोजन के लिए पूछा गया था लेकिन कोई राज्य सामने नहीं आया. महाराष्ट्र ने कहा कि बहुत सारे खेल आयोजनों की वजह से वह काफ़ी दबाव में है. हमारे अनुरोध पर वे राज्य की दो जगहों पर दो भागों में आयोजन कराने को तैयार हुए."

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मिश्रा ने बताया कि महाराष्ट्र में लड़के-लड़कियों के आयोजन एक साथ न कराए जाने के पीछे 'आधारभूत सुविधाओं का मुद्दा' था.

उन्होंने कहा, "यह कहना सही नहीं है कि लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग आयोजन नहीं होते हैं. अभी लड़कियों के लिए फ़ुटबॉल टूर्नामेंट अंडमान में हो रहे हैं और लड़कों के लिए ये कश्मीर में हो चुके हैं.

लेकिन पीटी उषा इस बात पर क़ायम हैं कि लड़के और लड़कियों के खेल आयोजन एक साथ कराए जाएं.

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