लालू के भरोसेमंद अधिकारी बने बेटों के सारथी

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राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के दोनों बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप यादव बिहार की नई नीतीश कुमार सरकार में नंबर दो और तीन की हैसियत रखते हैं. तेजस्वी बिहार के उपमुख्यमंत्री भी बनाए गए हैं.

पहली बार विधायक बनने के साथ ही अहम ज़िम्मेदारियां मिलने से इन दोनों के साथ-साथ लालू प्रसाद और नीतीश कुमार की आलोचना भी हो रही है.

लेकिन मंगलवार को बिहार सरकार में हुआ प्रशासनिक फेरबदल बताता है कि नीतीश कुमार ने अनुभवहीन तेजस्वी और तेजप्रताप की 'मदद' और 'मार्गदर्शन' का इंतज़ाम कर दिया है.

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दोनों के पास जो प्रमुख विभाग हैं उनका प्रधान सचिव ऐसे अफ़सरों को बनाया गया है जो कभी लालू प्रसाद यादव के काफ़ी क़रीबी रह चुके हैं.

तेजस्वी के पास अभी पथ निर्माण, भवन निर्माण, पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ज़िम्मेदारी है. इनमें पथ निर्माण विभाग सबसे अहम माना जाता है.

पथ निर्माण विभाग का नया मुख्य सचिव सुधीर कुमार को बनाया गया है. मूल रूप से हरियाणा के निवासी सुधीर कुमार 1982 बैच के आइएएस अधिकारी हैं.

केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर कुमार अभी एनएचएआई में थे. लालू प्रसाद जब 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे, तब वो उनके विषेष कार्य पदाधिकारी (ओएसडी) रहे.

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वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश्वर वात्स्यायन बताते हैं, ''बतौर रेल मंत्री लालू के कार्यकाल में भारतीय रेल का कायाकल्प करने का बड़ा श्रेय सुधीर कुमार को जाता है. रेलवे के कायाकल्प पर उन्होंने 'बैंकरप्सी टू बिलियंस' किताब भी लिखी, जिसे ऑक्सफ़ोर्ड ने प्रकाशित किया था.'

जानकारों के मुताबिक़ सुधीर कुमार ने 2000 में झारखंड अलग होने के बाद राबड़ी शासन में बिहार के अपने कर राजस्व को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई थी.

गौरतलब है कि झारखंड अलग होने के बाद बिहार के कर के ज़्यादातर स्रोत सूख गए थे. साल 2001 से 2004 के बीच सुधीर बिहार सरकार में वाणिज्य कर आयुक्त के पद पर थे.

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Image caption आरके महाजन को स्वास्थ्य विभाग में प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है.

लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप के पास जो अहम विभाग हैं उनमें स्वास्थ्य प्रमुख है. मंगलवार को ही बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रजनीश कुमार महाजन को स्वास्थ्य विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया.

1987 बैच के आईएएस अधिकारी रजनीश लालू प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल में उनके निजी सचिव थे. रजनीश मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के हैं.

इन दोनों अफ़सरों पर भरोसा करने की वजहें ज्ञानेश्वर वात्स्यायन कुछ यूं बताते हैं, ''ये रेल मंत्री के कार्यकाल में लालू प्रसाद के आज़माए अधिकारी हैं. परफ़ॉर्म करने वाले अफ़सर हैं. मतलब कि इनकी बातें दोनों बेटे मानते रहे तो काम भी ठीक होगा और उनके किसी 'ट्रैप' में फंसने का ख़तरा भी नहीं रहेगा.''

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