'नासमझ' मंत्री को छात्राओं ने पढ़ाया पाठ

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केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के भारत में महिलाओं को पूरी स्वतंत्रता है वाले बयान के बाद छात्रों ने उनका विरोध शुरू कर दिया है.

इनमें से कुछ मंगलवार को दिल्ली में स्मृति ईरानी के ऑफ़िस के बाहर जमा हुईं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों के नियम पढ़ने शुरू कर दिए और नारे लगाने लगीं.

वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी और पुलिसवाले यह सब देख रहे थे. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इनसे कैसे निपटा जाए.

छात्राओं ने स्मृति ईरानी के लिए एक तोहफ़ा भी छोड़ा, जिसमें हॉस्टल के नियमों की किताब रखी थी.

24 साल की कॉलेज छात्रा अविप्शा दास कहती हैं "स्मृति ईरानी के मंत्रालय के कॉलेज हॉस्टलों में छात्राओं को हर दिन कहा जाता है कि हमें कहां जाना है, कब जाना है, किससे मिलना है, कहां ठहरना है, क्या खाना है, क्या पहनना है, किससे बात करनी है और किससे प्रेम करना है?"

अविप्शा दास कहती हैं, "यह सूची बहुत लंबी है, हम तो उनकी अनुमति के बग़ैर अपने कमरे में एक पोस्टर भी नहीं चिपका सकते."

अविप्शा के मुताबिक़ जिस देश में महिलाओं के ऊपर इतना सामाजिक दबाव हो और जिनके साथ ऐसा भेदभाव होता हो, वहां एक मंत्री का इस तरह का बयान नासमझी है.

वो कहती हैं "यह मंत्री के लिए सूचना और जानकारी से भरा एक अनमोल तोहफ़ा है. हमें उम्मीद है कि इसे पढ़ने के बाद शायद वह समझदार बन जाएं."

अविप्शा दास के साथ ही कुछ और प्रदर्शनकारी 'पिंजड़ा तोड़' आंदोलन की सदस्य हैं.

ये लोग उस अजीब पुरुष मानसिकता से ख़िलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जिसने हॉस्टल में रहने वाली महिलाओं पर पाबंदियां लगा रखी हैं.

अमरीकी पत्रकार टीना ब्राउन के साथ बातचीन में स्मृति ईरानी ने कहा था, "मुझे नहीं लगता कि भारत में महिलाओं को कोई यह कहता है कि किस तरह का कपड़ा पहनना है, कैसे पहनना है, किससे मिलना है या कहां मिलना है?'' स्मृति ईरानी ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि महिलाओं पर कोई हुक्म चलाता है.

स्मृति ईरानी ने पिछले हफ़्ते दिल्ली में 'वूमन एंड वर्ल्ड' सम्मेलन में यह बयान दिया था.

स्मृति ईरानी पहले एक टीवी कलाकार रह चुकी हैं और हाई-प्रोफ़ाइल मंत्री हैं. उनके पास मानव संसाधन विकास मंत्रालय है जो देश में कई स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी चलाता है.

उनके इस बयान ने कई लोगों को हैरत में डाल दिया है कि भारत में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से वह अनजान क्यों बन रही हैं?

भारत में हर जगह लड़कियों और महिलाओं को मां-बाप, पति, ससुराल, पड़ोसी, शिक्षक, रिश्तेदार और हॉस्टल वार्डन तक यह कहता है कि वो क्या पहन सकती हैं और क्या नहीं.

भारत के कई गांवों में मौजूद ताक़तवर खाप पंचायतों से यह सुनने को मिलता है कि महिलाएं पश्चिमी कपड़े नहीं पहन सकती. वो मोबाइल फ़ोन नहीं रख सकती या फिर जवान मर्दों से बात नहीं कर सकती हैं.

यहां तक कि स्मृति ईरानी के ही कई साथी मंत्री और विपक्षी दलों के नेता भी महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक बयान देने की वजह से ख़बरों में रहे हैं.

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