जिन्हें भा गई ओडिसी की आलंकारिक शैली

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Image caption माधवी मुद्गल का मानना है, इनोवेशन बुरा नहीं है अगर वह परंपरा के दायरे में रहकर किया जाए.

पद्मश्री माधवी मुद्गल ओडिसी की अग्रणी नृत्यांगना हैं. माधवी का जन्म दिल्ली में हुआ. उनके पिता प्रोफ़ेसर विनयचंद्र मौदगल्य प्रसिद्ध गंधर्व महाविद्यालय (दिल्ली) के संस्थापक थे.

गंधर्व महाविद्यालय को दिल्ली का पहला हिंदुस्तानी संगीत और नृत्य विद्यालय माना जाता है.

माधवी मुद्गल का नृत्य संसार

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Image caption गुरु केलुचरण महापात्रा की शिष्या बनना माधवी मुदगल जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं.

इस तरह माधवी को बचपन से ही संगीत और नृत्य का माहौल मिला.

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Image caption वह बताती हैं ओडिसी नृत्य के माधुर्य और सौंदर्य ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित किया.

उन्होंने बचपन में कत्थक और भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लिया और कत्थक की मंच प्रस्तुतियाँ भी दीं.

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Image caption ओडिसी नृत्य शैली नाट्य शास्त्र में वर्णित ओदा नृत्य पर आधारित है.

नृत्य के साथ उन्होंने आर्किटेक्चर की पढ़ाई भी की पर आगे चलकर नृत्य को ही प्राथमिकता दी.

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Image caption इस नृत्य शैली की कुछ मुद्राएं भरतनाट्यम शैली से मिलती जुलती हैं.

कुछ समय बाद माधवी का रुझान ओडिसी की तरफ़ हुआ और उन्होंने गुरु हरेकृष्ण बहेरा से नृत्य सीखना शुरू किया.

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Image caption ओडिसी नृत्य का आरम्भ भूमि प्रणाम से होता है. उसके बाद विघ्नराज पूजा, फिर बटु नृत्य, इष्टदेव पूजा, पल्लवी नृत्य, अभिनय नृत्य और फिर आनंद नृत्य होता है.

आगे चलकर गुरु केलुचरण महापात्रा से बारीकियां सीखीं.

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Image caption ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में उड़ीसा में माहरी नाम का समाज था, जो कि शिव मंदिरों में यह नृत्य करता था. आगे चलकर गोतीपुआ का उदभव हुआ जिसमें नन्हें बालक नर्तकी के लिबास में यह नृत्य समाज के सामने करने लगे.

माधवी ओडिसी की नृत्य और आलंकारिक शैली में दक्ष हैं. उनके भाई पद्मश्री मधुप मुद्गल प्रसिद्ध ख़याल और भजन गायक हैं.

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Image caption इस नृत्य में संगीत के लिए अधिकतर पखावज, बाँसुरी, मंजीरा, सितार और तानपुरे का उपयोग किया जाता है.

माधवी की भतीजी आरुषि मुद्गल ने भी उन्हीं से ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण लिया है और वो भी प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना हैं.

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Image caption माधवी मेधावी नृत्यांगना होने के साथ-साथ बेहतरीन कोरियोग्राफ़र भी हैं. वे नृत्य में रसानुभूति को अहम मानती हैं.

माधवी मुद्गल को 1984 में संस्कृति अवार्ड, 1990 में पद्मश्री अवार्ड,1996 में उड़ीसा संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, 2000 में संगीत नाटक अकादमी (दिल्ली) अवार्ड और कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.

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Image caption माधवी मुद्गल मानती हैं कि आज की जीवन शैली को देखते हुए प्राचीन तरीके से गुरु शिष्य परंपरा को नहीं निभाया जा सकता, तब भी गुरु का हर शिष्य के साथ आत्मीय संबंध होता है और वह ज़्यादा से ज़्यादा नृत्य की बारीकियां अपने सभी शिष्यों को सिखाने की कोशिश करती हैं.

माधवी दिल्ली में रहती हैं और नियमित रूप से गंधर्व महाविद्यालय में ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण दे रही हैं.

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