मोदी ने की विपक्ष को पटाने की कोशिश

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संसद के शीतकालीन सत्र में चुनौतियों का सामना करने के लिए ज़रूरी था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी पार्टियों के साथ संबंध बेहतर करें.

इसका साफ़ असर लोकसभा में शनिवार को दिए गए उनके भाषण में दिखा. विपक्ष के प्रति उनके थोड़े से नरम दिखने के पीछे यही वजह थी.

इस सत्र के पहले दो दिन जिस तरह बहस चली और विपक्ष ने कट्टरवाद को बढ़ाने का इल्ज़ाम सरकार पर लगाया, वैसे माहौल में मोदी ने राजनीतिक विश्वास हासिल करने की काफ़ी कोशिश की.

लेकिन एक भाषण से इस प्रयास में वह किस हद तक सफल हो पाए हैं, यह तो कहना मुश्किल है.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी से मिलने की उनकी पहल भी इसी कोशिश का एक हिस्सा है.

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दूसरी तरफ़ राजनाथ सिंह ने संसद में धर्मनिरपेक्षता और पंथनिरेपक्षता पर जो चर्चा छेड़ी थी वह संघ परिवार का 20 साल पुराना मुद्दा है.

राजनाथ सिंह आज भी संघ के उस दायरे से निकल नहीं पाए हैं लेकिन सियासत और विचारधारा समान रहते हुए भी मोदी ने जिस तरह बातों को रखा वह एकदम अलग था.

उन्होंने अपनी बात में जिस तरह से आइडिया ऑफ़ इंडिया की बात बार-बार करते हुए दोहों और श्लोकों को पढ़ा, उससे वह साबित करना चाह रहे थे कि आइडिया ऑफ़ इंडिया की बात हमसे बेहतर कोई नहीं जानता.

संघ की विचारधारा अक्सर सेक्युलर और प्रगतिशील लोगों को कोसती रही है कि आइडिया ऑफ़ इंडिया के तहत आप सिर्फ़ धर्मनिरपेक्षता और समाजवादी विचारों की बात करते हैं.

हालांकि आज़ादी की लड़ाई और संविधान निर्माण में कहीं संघ परिवार की भूमिका नहीं रही है.

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के भाषण के बाद भी कोई नरमी नहीं दिखाई और वह अब भी आक्रामक मुद्रा में दिखाई दे रही है.

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लोहिया और नेहरू के ज़िक्र के बहाने भी मोदी ने काफ़ी कोशिश की माहौल को नरम बनाने और सदन को चलने देने के लिए विपक्ष को तैयार करने की.

मोदी का भाषण के दौरान बार-बार कर्तव्य पर ज़ोर देना और अधिकारों की बात नहीं करना भी संघ का पुराना एजेंडा रहा है.

यह बात भी गले से उतरने वाली नहीं है क्योंकि संविधान को देखें तो मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य दो अलग-अलग पाठ है.

कर्तव्य राज्य के नीति निर्देशक तत्व के अंतर्गत आते हैं. उसके लिए बाध्यता नहीं होती लेकिन अधिकारों के पालन के लिए राज्य बाध्य होता है.

(वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन से बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी की बातचीत पर आधारित)

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