अरे...एक ही सड़क के पांच नाम!

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एक लंबी सड़क के एक से ज्यादा नाम हो सकते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ने तो कमाल कर दिया है.

सरकार ने राज्य सचिवालय के पास कोई सवा तीन किलोमीटर लंबी एक सड़क का नाम पांच मशहूर लोगों के नाम पर रख दिया है.

अब आलम यह है कि इस सड़क का चार सौ मीटर लंबा हिस्सा किसी और से नाम से जाना जाता है तो आठ सौ मीटर किसी और नाम से. इससे आम लोगों के साथ-साथ इलाके का डाकिया भी परेशान है.

ममता बनर्जी के बारे में कहा जाता है कि उन्हें यूं भी सड़कों और रेलवे स्टेशनों का नाम महापुरुषों के नाम पर रखने का फितूर सा है. अब यह सड़क इसकी मिसाल बन गई है. किसी के मकान का एक हिस्सा एक सड़क पर है तो कमरे दूसरी सड़क पर.

कई लोगों का मानना है कि चुनाव से पहले सबको खुश करने और साधने की यह कवायद हास्यास्पद हो गई है.

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हावड़ा नगर निगम पर पहले वाममोर्चा का कब्जा था. उस समय सवा तीन किलोमीटर लंबी इस सड़क का नाम स्थानीय बांग्ला साहित्यकार असित बंद्योपाध्याय के नाम पर रखा गया था. तब उनके नाम का एक बोर्ड भी लगाया गया था.

लेकिन तीन महीने पहले हुए चुनाव में जीतकर नगर निगम में आने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने उस बोर्ड को हटा दिया है.

उसके बाद उसी सड़क को पांच हिस्सों में बांट कर उसका नाम पांच नामों पर रखा दिया गया. कोना एक्सप्रेसवे से हावड़ा शहर की ओर जाने वाली इस सड़क की शुरूआत में ही इन नामों वाला एक विशाल बोर्ड लगा है जिस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर भी है.

सड़कों का नाम बदलने से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है.

एक स्थानीय निवासी सुधीर मंडल कहते हैं, "पहले हम इस सड़क को ड्रेनेज कैनाल रोड के नाम से जानते थे, लेकिन अब तो इसके पांच नाम हो गए हैं."

इससे पता पूछने और बताने में काफी दिक्कत होती है.

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वहीं एक दूसरे निवासी फणींद्र नाथ कहते हैं, "एक सड़क का एक ही नाम होना चाहिए. वरना कोई नए नामों को याद नहीं रखेगा."

इलाके के डाकिया गौरांग दास कहते हैं, "हर चिठ्ठी पर अलग-अलग सड़कों के नाम लिखे होते हैं. इससे पत्र बांटने में देरी होती है."

दास के मुताबिक, "अब भी ज्यादातर लोग इस सड़क का पुराना नाम ड्रेनेज कैनाल रोड ही लिखते हैं."

लेकिन आखिर इतनी छोटी एक सड़क का नामकरण पांच लोगों के नाम पर करने की क्या मजबूरी थी?

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नगर निगम के मेयर परिषद सदस्य विभास हाजरा कहते हैं, "हमने शहर के विशिष्ट व्यक्तित्वों के नाम पर सड़क का नाम रखा है. वाममोर्चा बोर्ड ने ही उस सड़क का नाम नरेश दासगुप्ता, कानाई भट्टाचार्य और ज्ञानेंद्र नाथ सेन के नाम पर रखने का फैसला किया था. लेकिन उसे बोर्ड लगाने का मौका नहीं मिला."

वे कहते हैं, "हमने पहले के फैसले को ही लागू किया है. इसमें सिर्फ भोलानाथ चक्रवर्ती का नाम जोड़ा गया है."

इस सड़क को जीटी रोड से जोड़ने वाले हिस्से का नाम पहले ईस्ट-वेस्ट बाइपास था. बाद में इसका नया नाम मशहूर फुटबालर पद्मश्री शैलेन मान्ना के नाम पर रखा गया. वह हिस्सा फिलहाल जस का तस है.

नई सूची में असित बंद्योपाध्याय का नाम तो है लेकिन चार नए नाम भी जुड़ गए हैं. इनमें सबसे दिलचस्प नाम है मशहूर होम्योपैथ चिकित्सक डा. भोला नाथ चक्रवर्ती का.

वे नगर निगम के मेयर रथीन चक्रवर्ती के पिता भी हैं. उनकी याद में एक विशालकाय तोरणद्वार भी बना है. बाकियों का नसीब ऐसा नहीं है.

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