राज्यपाल को हटाने के लिए राष्ट्रपति से गुहार

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असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने राज्यपाल पद्मनाभ बालकृष्ण आचार्य को तत्काल हटाने के लिए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मदद मांगी है.

राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री ने कहा कि आचार्य के राज्यपाल बने रहने से संसदीय प्रणाली के कामकाज में भारी कठिनाई उत्पन्न हो सकती है.

''राज्यपाल के कार्यकलापों से राज्य के धर्मनिरपेक्ष लोकाचार में भी दरारें पैदा होने की आशंका है क्योंकि उनका ऑफ़िस भाजपा कार्यालय की तरह काम कर रहा है.''

नगालैंड के राज्यपाल आचार्य असम के प्रभारी राज्यपाल हैं. गोगोई ने राष्ट्रपति से मांग की कि वह असम के हित में राज्यपाल को तत्काल वापस बुला लें.

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मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि आचार्य को असम के प्रभारी राज्यपाल के बतौर भेजे जाने का उन्होंने यह मानकर स्वागत किया था कि वह इस शीर्ष संवैधानिक पद पर समुचित और निष्पक्ष भाव से कार्य करेंगे.

लेकिन उनके बयान और काम करने के तरीक़ों से राज्यपाल पद की गरिमा घटी है.

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में आचार्य के विवादास्पद बयान का भी ज़िक्र किया है.

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के तहत भारत आने वाले हिंदुओं के बारे में आचार्य ने हाल ही में कहा था कि 'हिंदुस्तान हिंदुओं के लिए है' और ऐसे लोगों को भारत अपने यहां शरण देगा.

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साथ ही उन्होंने कहा था कि अगर किसी भारतीय मुसलमान को दुनिया के किसी भी देश में सताया जा रहा है तो वह पाकिस्तान जाने के लिए ‘आज़ाद’ है.

उनके बयान का राज्य में ज़ोरदार विरोध हो रहा है. उन्हें हटाने की मांग लेकर सत्ताधारी कांग्रेस ने शुक्रवार को राजभवन तक रैली भी निकाली थी.

इस बीच भाजपा ने आचार्य का बचाव किया है. पार्टी महासचिव राम माधव ने गुवाहाटी में कहा कि राज्यपाल के बयान की ग़लत व्याख्या की जा रही है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गोगोई के नेतृत्व में राज्य सरकार आचार्य के बयान के संबंध में लोगों को गुमराह कर रही है.

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