जेेएनयू के हॉस्टल में 'हवन' पर हंगामा

जेएनयू का पुस्तकालय.

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के झेलम हॉस्टल के एक कमरे में हवन करने और वार्डन की ओर से उसे रोकने के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है.

वार्डन के समर्थन में जेएनयू छात्र संघ और विश्वविवद्यालय के प्राध्यापकों का संगठन सामने आया है. वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) उनका विरोध कर रहा है.

बीते 21 नवंबर को एबीवीपी से जुड़े छात्र और जेएनयू छात्र संघ के काउंसलर जितेंद्र धाकड़ का जन्मदिन था. वो जेएनयू के झेलम हॉ़स्टल में रहते हैं.

झेलम हॉस्टल के तीन वार्डन में से एक हिमांशु ने बीबीसी से कहा, ''हमें शिकायत मिली कि हॉस्टल के एक कमरे से धुआं निकल रहा है. जब हम वहां पहुंचे तो देखा कि जितेंद्र अपने कुछ दोस्तों के साथ हवन कर रहे थे. इससे धुआं निकल रहा था.''

उन्होंने कहा, ''कमरे में इस तरह हवन से आग लगने का ख़तरा था, इसलिए हमने जितेंद्र और उनके साथियों को तुरंत कमरे से बाहर निकलने को कहा और इस तरह के आयोजन से भी मना किया और इसकी शिकायत जेएनयू प्रशासन से की.''

बाद में वार्डन ने उनमें से दो छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया.

Image caption दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर (फ़ाइल फ़ोटो)

लेकिन इस मामले ने उस वक़्त तूल पकड़ा जब जितेंद्र और उनके दोस्तों ने वॉर्डन के ख़िलाफ़ धार्मिक भावना से छेड़छाड़, यौन प्रताड़ना और शोषण की शिकायत पुलिस से कर दी.

जितेंद्र धाकड़ ने बताया, "मैं अपनी परंपरा का सम्मान करता हूं इसलिए जन्मदिन के दिन मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ अपने कमरे में पूजा कर रहा था. हमारी पूजा समाप्त होने वाली ही थी कि हॉस्टल वार्डन आए और पूजा करने वाली जगह पर चप्पल पहनकर चढ़ गए. उन्होंने हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया और हमारे साथ बदतमीज़ी की."

मामले को तूल पकड़ता देख जेएनयू छात्र संघ ने रविवार को एक प्रेस रिलीज़ जारी कर कहा कि एबीवीपी ने इस मामले को सांप्रदायिक रंग देना शुरू कर दिया है. छात्र संघ का कहना है कि एबीवीपी अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े झेलम हॉस्टल के एक वार्डन को निशाना बना रही है.

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छात्र संघ ने बयान में कहा है कि जेएनयू एबीवीपी के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर इस मामले में झूठा और शर्मनाक प्रचार अभियान चला रहे हैं.

जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष शैहला राशिद ने बयान में कहा है, "मामला हॉस्टल के एक बंद कमरे में आग जलाने का है. झेलम हॉस्टल के कमरे में धुएं की शिकायत दूसरे कमरों के लड़कों ने की थी, इसलिए वार्डन को कार्रवाई करनी पड़ी. डॉक्टर बर्टन क्लीटस को अपनी ड्यूटी करने के लिए प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए और वो भी जब उस समय उनके साथ दो और वार्डन भी थे.''

जेएनयू की प्रोफ़ेसर आयशा क़िदवई ने अपने फ़ेसबुक पेज पर इस घटना का ज़िक्र करते हुए लिखा है, ''प्रोफ़ेसर क्लीटस के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर ग़लत आरोप लगाए जा रहे हैं. एक ख़ास समूह के लोग उनकी धार्मिक पहचान के कारण उनको बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.''

जेएनयू के प्राध्यापकों का संगठन जेएनयू टीचर्स एसोसियेशन (जेएनयूटीए) भी वार्डन के समर्थन में आगे आया है.

उसका कहना है कि छात्रों का एक समूह इस मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दे रहा है. टीचर्स एसोसियेशन ने जेएनयू प्रशासन से प्रोफ़ेसर क्लीटस को सुरक्षा दिए जाने की अपील की है.

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