ये हैं आम आदमी पार्टी के 'पांच दाग़दार'?

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Image caption मनोज कुमार, अखिलेशपति त्रिपाठी और जीतेंद्र तोमर

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के सत्तारूढ़ होने के बाद से अबतक उसके पाँच विधायकों को अलग-अलग मामलों में गिरफ़्तार किया जा चुका है.

आइए नज़र डालते हैं कि इन पांच विधायकों और उन पर लगे आरोपों की प्रकृति पर.

अखिलेशपति त्रिपाठी: विधायक, मॉडल टाउन

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ मॉडल टाउन से विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी को 2013 के दंगे भड़काने और आपराधिक धमकी देनने के एक मामले में उन्हें गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया था. इस मामले में उनके ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट जारी किया गया था. बाद मं उन्हें अदालत से ज़मानत मिल गई.

उनके एक साथी राहुल शुक्ल ने बताया कि अखिलेश त्रिपाठी 23 तारीख़ को अदालत में इसलिए नहीं पेश हो पाए क्योंकि उस वक़्त वो बिहार में नीतीश कुमार सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने गए हुए थे. वापस आने के लिए उन्हें फ़्लाइट नहीं मिली.

वो बताते हैं कि 2013 का मामला दिल्ली के लालबाग़ में आप और कांग्रेस समर्थकों के बीच हुई झड़प का था. यह मामला पूरी तरह राजनीतिक था.

अखिलेश दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी करने आए थे. लेकिन अन्ना आंदोलन से जुड़ गए. इस फ़ैसले से अखिलेश के माता-पिता ख़ुश नहीं थे. लेकिन विधानसभा चुनाव में आप का टिकट मिलने की घोषणा से उनका मन बदल गया.

राहुल शुक्ला के मुताबिक़ गोरखपुर के निवासी अखिलेश त्रिपाठी के ख़िलाफ़ मामला जल्द ख़त्म हो जाएगा क्योंकि इसमें गवाह मुकर रहे हैं.

सुरिंदर सिंह: विधायक, दिल्ली कैंट

पुलिस ने इस साल अगस्त में सुरिंदर सिंह को कथित तौर पर दिल्ली नगर निगम के एक कर्मचारी के साथ मारपीट के आरोप में गिरफ़्तार किया था. बाद में उन्हें, उनके ड्राइवर पंकज और साथी प्रवीन को रिहा कर दिया गया.

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सुरिंदर के मुताबिक़ उन पर हत्या, किडनैपिंग और जातिसूचक शब्द के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए थे जो राजनीति से प्रेरित थे.

उनके मुताबिक़ जब वो कनॉट प्लेस से यशवंत पैलेस जा रहे थे तब उन्होंने कुछ एनडीएमसी कर्मचारियों को किसी लड़के को डराते-धमकाते और जबरन पैसे लेते हुए देखा था. जब उन्होंने कर्मचारियों की शिकायत करने की बात की तो भाजपा नेताओं के साथ मिल कर दिल्ली पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ कथित तौर पर झूठे आरोप गढ़ दिए.

वो कहते हैं, ''दिल्ली में हार के कारण नरेंद्र मोदी और भाजपा की बेइज़्जती हुई है. इस वजह से दिल्ली पुलिस सरकार के साथ मिलकर ये कार्रवाइयां कर रही है.''

सुरिंदर सिंह का मामला अभी अदालत में लंबित है.

जीतेंद्र सिंह तोमर: विधायक, त्रिनगर

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दिल्ली के पूर्व क़ानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर को फ़र्ज़ी डिग्री के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

ख़बरों के मुताबिक़ शुरुआत में दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर कर तोमर की डिग्री को चुनौती दी गई थी. याचिका एक आरटीआई पर आधारित थी. आरटीआई आवेदन के जवाब में उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद स्थित अवध विश्वविद्यालय ने कहा था कि उसने जीतेंद्र सिंह तोमर को बीएससी की डिग्री नहीं दी.

इसी डिग्री के आधार पर तोमर ने क़ानून की डिग्री के लिए आवेदन दिया था. रिपोर्टों के मुताबिक़ तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय ने अदालत से कहा कि उसने तोमर को क़ानून की कोई डिग्री नहीं दी है.

पुलिस के मुताबिक़ दो टीमों ने अवध विश्वविद्यालय और तिलका मांझी विश्वविद्यालय से मिली तोमर की डिग्रियों की जाँच की. विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों से बातचीत में पता चला कि जिस रोल नंबर से जितेंद्र तोमर को डिग्री मिली थी, वो ग़लत था.

पुलिस ने कहा था कि जितेंद्र तोमर की डिग्री पर हस्ताक्षर फ़र्जी हैं. उसका कहना है कि यह कोई साज़िश नहीं है, जैसा कि आप आरोप लगा रही है.

जितेंद्र सिंह तोमर अपनी डिग्री को सही बताते रहे. दिल्ली सरकार भी उनका साथ दे रही थी. लेकिन बाद में तोमर ने मंत्रीपद से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया.

तोमर का मामला अभी अदालत में लंबित है.

मनोज कुमार: विधायक, कोंडली

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मनोज कुमार पर कथित धोखाधड़ी और ज़मीन हड़पने का मामला दर्ज किया गया था.

इस पर आप ने कहा था कि केंद्र की भाजपा सरकार दिल्ली पुलिस को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है.

पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा था कि एक तरफ़ दिल्ली में हज़ारों एफ़आईआर पेंडिंग हैं. मोदी सरकार ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन 2014 के एक एफ़आईआर के आधार पर मनोज कुमार को गिरफ़्तार कर लिया गया.

ख़बरों के मुताबिक़ मनोज कुमार के बिज़नेस पार्टनर विनोद कुमार ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने नवंबर 2012 को मनोज कुमार को प्लॉट ख़रीदने के लिए छह लाख रुपए दिए थे लेकिन उन्होंने ये पैसे नहीं लौटाए.

मामले की स्थिति अभी साफ़ नहीं है.

सोमनाथ भारती : विधायक, मालवीयनगर

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सोमनाथ भारती की पत्नी लिपिका ने उनके ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है. लिपिका अपने आरोपों को लेकर दिल्ली महिला आयोग के पास गईं.

लिपिका और सोमनाथ भारती की 2010 में शादी हुई थी. लिपिका ने सोमनाथ भारती पर उन्हें जान से मारने की कोशिश और अपने कुत्ते को उन पर हमला करने के लिए उकसाने का भी आरोप लगाया था.

रिपोर्टों के अनुसार सोमनाथ भारती की अग्रिम ज़मानत याचिका रद्द होने के कई दिन बाद तक वो पुलिस को चकमा देते रहे. यहां तक कि पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने उन्हें ख़ुद को पुलिस के हवाले करने को कहा.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कहने के बाद उन्होंने ख़ुद को पुलिस के हवाले कर दिया.

भारती का मामला अभी अदालत में विचाराधीन है.

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