सिपाही ने बनाए क्राइम से लड़ने के सॉफ्टवेयर

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दिलीप ठाकुर पुलिस कांस्टेबल हैं, सिर्फ दसवीं क्लास पास, लेकिन गुजरात पुलिस के मामलों की जांच उनके सॉफ्टवेयर के बिना अधूरी रहती हैं.

उनके तैयार सॉफ्टवेयर राज्य पुलिस के अधिकारियों और कांस्टेबलों के कंप्यूटर और मोबाइल फोन में फिट हैं जिन्हें वो जुर्म की जांच-पड़ताल में इस्तेमाल करते हैं.

दिलीप की बहाली 1996 में मेहसाणा पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर हुई थी. गुजरात पुलिस ने उसी साल कंप्यूटर सिस्टम का अधिक प्रयोग शुरू किया था.

उस वक़्त के मेहसाणा के पुलिस अधीक्षक विनोद मल को एक ऐसे पुलिस वाले की तलाश थी जो कंप्यूटर में रूचि रखता हो.

हालांकि दिलीप को लगता था कि उनकी महज़ दसवीं तक पढ़ाई इसमें रूकावट होगी.

लेकिन फिर स्थिति कुछ ऐसी बनी कि दिलीप का यक़ीन ख़ुद पर बढ़ता ही गया.

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साल 2008 में अहमदाबाद में जब सीरियल बम धमाके हुए तब दिलीप मेहसाणा में ही कार्यरत थे.

उन्हें अहमदाबाद पुलिस का निमंत्रण मिला कि वो वहां जाए और उनकी मदद करें.

फिर गुजरात के भरूच में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दो कार्यकर्ताओं की अनजान लोगों ने गोली मार के हत्या कर दी. इस मामले को राज्य पुलिस प्रमुख पी सी ठाकुर ने गुजरात एंटी टेररिस्ट स्कवायड को जांच के लिए दे दिया.

तबतक दिलीप भी अहमदाबाद आ चुके थे. उन्हें एटीएस की मदद करने को कहा गया.

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दिलीप को नई दिशा देने वाले एसपी विनोद मल कहते हैं कि चयन करते वक़्त उन्होंने दिलीप की काम के प्रति उत्साह को देखा था. लेकिन फिर दिलीप ने सूझबूझ का इस्तेमाल किया और मेहनत के बल से ख़ास सॉफ्टवेयर तैयार करने में सफ़ल हो गए.

उन्होंने ये काम तब किया जब उन्हें रोज़मर्रे का काम भी जारी रखना था.

दिलीप को संतोष है कि आला अफसरों ने उनके काम की सराहना की है.

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर के एन पटेल कहते हैं कि दिलीप के द्वारा गुजरात पुलिस के लिए बनाए एकलव्य और पीनाक जैसे सॉफ्टवेयर के कारण गुजरात की पुलिस को एक नई ऊंचाई मिली है.

दिलीप के काम को देखते हुए अहमदाबाद पुलिस कमिशनर शिवानंद झा ने डीजीपी गुजरात के पास दिलीप को सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त करने का प्रस्ताव भेजा है.

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