500 मीटर का पुल बनाने में 12 साल लगे

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'नौ दिन में चले ढाई कोस' की कहावत पुरानी हो गई है. अब 12 साल में 500 मीटर की दूरी तय की जाती है. मामला झारखंड के नक्सल प्रभावित सारंडा इलाक़े का है.

यहां 12 साल की जद्दोजहद के बाद मनोहरपुर और पारलिपोस के बीच कोयल नदी पर 500 मीटर लंबा पुल बना है. अब इसके विधिवत उद्घाटन का इंतज़ार है. लेकिन लोगों ने अभी से इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है.

स्थानीय पत्रकार तारिक़ बताते हैं कि वर्ष 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव यहां एक अस्पताल के उद्घाटन के लिए आए थे. तब यह बिहार का हिस्सा था.

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पारलिपोस समेत दर्जनों गांवों के लोगों ने उनसे कोयल नदी पर पुल बनवाने की मांग की थी.

इस पुल के लिए प्रधानमंत्री राव ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को कहा जिसके बाद पुल निर्माण का टेंडर निकाला गया.

जिस अस्पताल के उद्घाटन के लिए नरसिंह राव यहां आए, उसका निर्माण द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती ने कराया था. उन दिनों वे यहीं रहते थे.

माज आश्रम के नाम से प्रसिद्ध स्वामी स्वरुपानंद का विश्व कल्याण आश्रम यहां है. देश-विदेश के लोग आश्रम में आते हैं. इस कारण वे स्वयं इस पुल के लिए चिंतित थे.

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तारिक़ ने बताया कि पुल का निर्माण शुरू होने पर नक्सलियों ने इसे तोड़ दिया. ठेकेदार को भी भगा दिया गया.

इस बीच, साल 2000 में झारखंड अलग राज्य बना. मई 2003 में झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस पुल का फिर से शिलान्यास किया.

निर्माण शुरू होते ही नक्सलियों ने फिर से पुल बनने का विरोध किया. बताया जाता है कि उन्होंने लेवी मांगी. मशीनों को फूंक दिया. नतीजतन, इसके निर्माण में लगी कंपनी ने काम छोड़ दिया. इसके बाद पुल का काम रुक गया.

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सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के झारखंड सेक्टर के आईजी राकेश कुमार मिश्र बताते हैं कि बार-बार अवरोध से तंग सरकार ने सीआरपीएफ से मदद मांगी.

इसके बाद सीआरपीएफ की सुरक्षा में एक बार फिर से पुल बनना शुरू हुआ. गांव वालों ने भी सहयोग किया. तब जाकर पुल पूरा हो सका.

यह पुल कायदा पंचायत का हिस्सा है. यहां के मुखिया सोमनाथ गोलुवा ने बीबीसी को बताया कि पुल बन जाने से 10 पंचायतों के 35 से भी अधिक गांवों को लोगों को फायदा हुआ है.

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अब मनोहरपुर और आनंदपुर प्रखंडों के हज़ारों गांव वालों को नाव से नदी के दूसरी ओर नहीं जाना पड़ता.

पश्चिमी सिंहभूम के एसपी माइकल राज एस ने बताया कि तब गोईलकेरा थाने की पुलिस संपूर्ण इलाके में गश्त नहीं कर पाती थी, क्योंकि बीच में कोयल नदी थी.

वो कहते हैं कि इसे या तो नाव से पार करना होता था, या फिर 40 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करके वैकल्पिक रास्ते से गश्त के लिए जाना होता था. अब यह काम आसान हो गया है.

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