रातोंरात रिलीफ़ कैंप बना राजाजी मेमोरियल

चेन्नई के गांधी मंडपम से सटे हुए इस ऊंचे गोपुरम में सामान्य दिनों में रोज़ लगभग 20 सैलानी ही आते थे.

लेकिन भीषण बारिश और बाढ़ के बाद राजाजी मेमोरियल अब क़रीब दो सौ लोगों का राहत शिविर बन चुका है.

बाहर की गाड़ी से मुफ़्त बँटने वाले खाने को अंदर लाते हुए थिरु से मेरी मुलाक़ात हुई.

उन्होंने कहा, "चार दिनों से इसी ठिकाने का सहारा है. हम सब यहाँ एक गाँव की तरह रह रहे हैं और किसी तरह बारिश से बचने के लिए छत मिल गई है."

यह पूछने पर कि क्या उन्हें सी राजगोपालाचारी और इस मेमोरियल के बारे में कोई अंदाज़ा है, थिरु ने इनकार में सिर हिला दिया.

अंदर बड़े से हॉल में बूढ़े और बच्चे ख़ामोशी से बैठे अपने डूब चुके ठिकानों के ख़्याल में गुम दिखते हैं.

52 वर्षीय अमला और उनकी बहन एक दिसंबर को अपने घर से सिर्फ़ तीन चादरें और गहने लेकर भाग सकीं.

उन्होंने बताया, "उस दिन बारिश से पहली बार डर लग रहा था. सुबह के बाद जब आँगन तक में पानी जमा होने लगा तो मुझे लगा कि घर त्यागने का समय आ चुका है".

अमला के साथ उनका पालतू जानवर भी इसी कैंप में रह रहा है.

राजाजी मेमोरियल रिलीफ़ कैंप में ज़्यादातर वे लोग हैं जो रात को अपने घरों में जलभराव होते ही भाग निकले और यहाँ आकर शरण ली.

अब चूँकि ये एक पर्यटक केंद्र ही है तो ज़ाहिर है हर तरह की सुविधाएं तो नहीं मिल सकेंगी.

राजम्मा बतातीं है कि यहां रहना रेलवे स्टेशन से भी बदतर है.

उन्होंने कहा, "रेलवे स्टेशन पर शौचालय तो होते हैं. मेरी छोड़िए, मेरी पोती तक को बाहर मैदान में जाना पड़ता है और पूरे पार्क में पानी भी भरा हुआ है".

चेन्नई के तमाम इलाक़ों में पानी भरने के बाद महामारी का ख़तरा भी मंडरा रहा है.

जहाँ एक तरफ़ सीवर लाइनें बाहर सड़कों पर बह रहीं हैं वहीं दूसरी तरफ़ राजाजी मेमोरियल जैसी जगहों पर शरण पाने वाले सैकड़ों लोगों के पास शौचालय तक की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है.

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