एक सिरीज़ और 1.5 अरब लोगों की उम्मीद

इमेज कॉपीरइट PTI

अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर एक बैठक में शामिल होने इस्लामाबाद जा रहीं भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज क्या वहां दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध को बहाल करने पर चर्चा करेंगी?

पिछले कुछ महीनों में इस मसले पर दोनों देशों में काफ़ी चर्चा हो चुकी है.

जहां तक भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड के आपसी संबंधों का सवाल है, दोनों बोर्ड अगले छह सालों में छह द्वीपक्षीय सिरीज़ के आयोजन पर सहमति जता चुके हैं.

लेकिन जब तक दोनों सरकारें इस दिशा में नरम रवैया नहीं अपनाएंगी, तब तक क्रिकेट बोर्डों के बीच हुए समझौते का कोई मतलब नहीं है.

इमेज कॉपीरइट AP

मेरी समझ से भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सुधारने के लिए क्रिकेट एक बेहतर ज़रिया है.

हालांकि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तनाव का असर भी क्रिकेट को ही भुगतना पड़ता है. क्या यह बेहतर नहीं होगा कि हमें बातचीत की प्रक्रिया को क़ायम रखने के लिए के लिए क्रिकेट का सहारा लेना चाहिए?

अगर खेल के नज़रिए से देखें तो, ये साफ़ है कि भारत और पाकिस्तान से बड़ा क्रिकेट का कोई मुक़ाबला नहीं है. परंपरागत तौर पर इसका रोमांच ऐशेज़ को टक्कर देने वाला है, इसमें तनाव ज़्यादा होता है.

जब ये दो परंपरागत प्रतिद्वंद्वी क्रिकेट के मैदान में टकराते हैं तो दुनिया में हर छह में एक आदमी इसके रोमांच में डूब जाता है, इसकी मिसाल इसी साल वर्ल्ड कप के दौरान एडिलेड में दोनों देशों के बीच हुए मुक़ाबले के दौरान भी देखने को मिली.

इमेज कॉपीरइट Both Photos by AFP

उस मैच के लिए बुकिंग खुलने के कुछ ही घंटों में सारे टिकट बिक गए थे, वह भी क़रीब दो साल पहले. इससे पहले ऐसा किसी वर्ल्ड कप और आईसीसी प्रतियोगिता में देखने को नहीं मिला.

इसके बावजूद भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट संबंध बहाल नहीं हो पा रहे हैं. दोनों देशों के बीच आख़िरी बार सिरीज़ 2007 में हुई थी, जब पाकिस्तान ने भारत का दौरा किया था.

इसके बाद 2013 में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम एक बार फिर भारत दौरे पर आई थी, लेकिन तीन वनडे और दो टी-20 मैच खेलने के संक्षिप्त दौर के लिए.

इमेज कॉपीरइट Getty

इस हिसाब से देखें, तो अब भारत के पाकिस्तान जाने की बारी है. लेकिन यह काफ़ी जटिल मसला है. 2009 में श्रीलंकाई टीम पर पाकिस्तान में हुए हमले के बाद, दूसरी टीमें पाकिस्तान के दौरे से इनकार करती रही हैं. पिछले सीज़न में ज़िम्बाब्वे ने पाकिस्तान का दौरा जरूर किया लेकिन दूसरे देश अभी तक वहां जाने के लिए अनिच्छुक ही दिखते हैं.

जहां तक भारत की बात है, मसला और भी जटिल हो जाता है. भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंधों में खींचतान चलती रहती है. हाल के सालों में, भारत पर कई चरमपंथी हमले हुए हैं, इनमें मुंबई पर 26 नवंबर, 2008 को हुआ हमला भी शामिल है. इन सबके तार पाकिस्तान से जुड़े रहे हैं.

दूसरी टीमों के पाकिस्तान न आने की इच्छा को देखते हुए पाकिस्तान ने संयुक्त अरब अमीरात को अपना घरेलू मैदान बनाया. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सिरीज़ के लिए दूसरे देश अरब अमीरात का दौरा करते रहे हैं लेकिन भारत ने यहां दूरी ही बरती है.

नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए तो उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्ष के साथ पाकिस्तान के नवाज़ शरीफ़ को भी आमंत्रित किया. इससे भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंधों को गति मिली.

इमेज कॉपीरइट AP

इसके तुरंत बाद ही, जगमोहन डालमिया भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष बने, उधर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया शहरयार ख़ान बने. डालमिया और ख़ान आपस में दोस्त थे. दोनों पिछले सीज़न कोलकाता में मिले और दोनों देशों की आपसी सिरीज़ पर बातचीत की.

लेकिन चुनौतियां अपने जगह बनी हुई थीं, जब सब कुछ ठीक दिखने लगा था, तभी नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी से पैदा तनाव ने भारत में चिंता बढ़ा दी.

इसके बाद डालमिया का निधन हो गया. पाकिस्तान के शहरयार ख़ान ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष शशांक मनोहर के पास भी बात पहुंचाई. दोनों के बीच अक्टूबर में मुंबई में होने वाली बैठक शिवसेना के विरोध के चलते नहीं हो पाई.

इमेज कॉपीरइट AFP

इसके बाद कभी भारतीय क्रिकेट बोर्ड नरम पड़ा तो कभी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड. दोनों अपना स्टैंड भी बदलते रहे. लेकिन सब संकेतों से यही ज़ाहिर हुआ तो दोनों सिरीज़ का आयोजन चाहते हैं.

इन सबके बीच शशांक मनोहर की स्थिति और भी मुश्किल हो गई है. वे बीसीसीआई के अध्यक्ष के साथ साथ आईसीसी के चेयरमैन भी हैं. ऐसे में, उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पाकिस्तानी क्रिकेट को कोई नुकसान नहीं उठाना पड़े.

भारतीय क्रिकेट बोर्ड और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के बीच अब तक हुई बातचीत में भारत अरब अमीरात में खेलने को तैयार नहीं है जबकि पाकिस्तान भारत नहीं आना चाहता.

ऐसे में, दोनों बोर्डों ने श्रीलंका में सिरीज़ कराने पर सहमति जताई. इसके बाद मामला दोनों सरकारों के पाले में चला गया. पाकिस्तान से सिरीज़ के लिए हरी झंडी दे दी है लेकिन भारत सरकार के फ़ैसले का इंतज़ार है.

ऐसे में क्या सुषमा स्वराज के इस्लामाबाद दौरे के दौरान क्या सिरीज़ को हरी झंडी मिलेगी, क्या इस सीज़न में भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिरीज़ का आयोजन होगा?

यह ऐसा सवाल है जिसका जवाब 1.5 अरब लोग जानना चाहते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार