चेन्नई के आगे कडलोर को भुला दिया?

चेन्नई से क़रीब पांच घंटे की दूरी पर है तमिलनाडु का कडलोर ज़िला जो पिछले एक महीने से बारिश और बाढ़ झेल रहा है.

इससे पहले कडलोर में 2004 सुनामी ने ख़ूब कहर बरपा किया था.

लेकिन पिछले एक महीने से कडलोर के निवासी बारिश के बढ़ते हुए पानी से बेहाल हैं.

ज़िला कलक्टर सुरेश कुमार ने बताया, "28 दिन से हम सब मिल कर इस मुसीबत से निपटने की कोशिश कर रहे हैं. कुल 210 गाँव इस बाढ़ से प्रभावित हैं जिसमें से 26 गाँव पूरी तरह डूब चुके हैं. क़रीब 42,000 लोगों को 70 से ज़्यादा राहत शिविरों में जगह दी जा रही है."

Image caption मलरकोडाई (दाएं) एक राहत शिविर में तीन हफ्ते से रह रही हैं.

इस पूरे इलाके में बाढ़ और बारिश के चलते होने वाली मौतों की संख्या 50 तक पहुँच चुकी है.

हालाँकि मारे गए लोगों के परिवारजनों को चार-चार लाख रुपए दिए गए हैं लेकिन जिनका घर उजड़ चुका है, उनका भविष्य अंधकारमय है.

मलरकोडाई एक राहत शिविर में तीन हफ्ते से रह रही हैं. उन्होंने बताया, "कब तक मदद के खाने पर काम चलेगा. हमारा सब बर्बाद हो गया है, कहीं जाने लायक नहीं बचे हैं."

कडलोर शहर में शायद ही कोई इलाका बचा है जहाँ बारिश ने अपने निशान ना छोड़े हों.

स्थिति इतनी बदतर हो चुकी थी कि सोमवार को कुछ लोगों ने शहर के कई हिस्सों में राहत सामग्री तक लूट ली और अब हर राहत सामग्री के साथ पुलिस का पहरा चलता है.

कम से कम चेन्नई में इस तरह का मंज़र देखने को नहीं मिला था इसलिए ये भी लगा कि क्या कडलोर को राजधानी चेन्नई के मुक़ाबले कम तवज्जो मिली.

कडलोर से सटे पुद्दुचेरी के निवासी रामनाथन ने कहा, "चेन्नई में कम समय में ज़्यादा बारिश से हाहाकर मच गया. लेकिन कडलोर में मिलते-जुलते हालात पिछले एक महीने से हैं. वैसे भी तमिलनाडु की पांच बड़ी नदियां इसी ज़िले में आकर समुद्र में मिलती हैं."

Image caption ज़िला कलक्टर सुरेश कुमार के दफ्तर के सामने भी पानी जमा है.

लेकिन ज़िले के कई कैम्पों में हालात बेहतर नहीं है क्योंकि लोगों के पास पर्याप्त कपड़े नहीं हैं और उनका सारा सामान डूब चुका है.

सेलवी और विजय यहाँ सुबह से शाम बस घड़ी देख कर बिताते हैं क्योंकि वापस जाने का पता मिट चुका है.

विजय ने बताया, "मेरे सभी सर्टिफिकेट, मार्कशीट वगैरह पानी की भेंट चढ़ चुके हैं. आगे क्या होगा कुछ पता नहीं".

कुडलम, चिदंबरम और नेलिकुप्पम जैसे इलाको में अब भी इतना पानी भरा है कि पैदल या गाड़ी के ज़रिए भी सड़क या मैदान पार करना मुश्किल है.

ज़िला कलक्टर के दफ़्तर तक के सामने भी पानी इतना है कि पैदल चलने वाला एक पूरा पुल उसमें डूबा हुआ है.

राज्य प्रशासन की तरफ से कोशिशें तब और तेज़ हो गई हैं जबसे स्थानीय अख़बारों में यहाँ की कष्टकारी स्थिति की ख़बरें पहुँचने लगीं.

कलक्टर कार्यालय में मेरी मुलाक़ात तमिलनाडु के ग्रामीण विकास और पंचायत राज सचिव गगन सिंह बेदी से हुई जिन्हें मुख्यमंत्री ने कडलोर के राहत-बचाव कार्य की देखरेख करने भेज रखा है.

ये भी महज़ इत्तेफ़ाक़ से ज़्यादा है क्योंकि गगन बेदी यहाँ के कलक्टर थे जब सुनामी ने कडलोर में एक कठोर दस्तक दी थी.

निश्चित तौर पर नवंबर में हुई बारिश और बाढ़ ने चेन्नई की कमर तोड़ दी है लेकिन बराबरी का नुकसान आस-पड़ोस में भी हुआ जिसे थोड़ी और तरजीह की आस है.

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