चेन्नई में हैज़ा या पीलिया के संकेत नहीं

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तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में भारी बारिश के एक सप्ताह बाद महामारी के कोई संकेत दिखाई नहीं देने से शहर के स्वास्थ्य अधिकारी और डॉक्टर राहत महसूस कर रहे हैं. लेकिन शहर में जिस पैमाने पर जल जमाव है उसे लेकर एजेंसियां सावधानी बरत रही हैं.

तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन ने बीबीसी को बताया, "हालांकि हमने राहत की सांस ली है लेकिन अगले चार से छह हफ़्ते तक हम महामारी को लेकर निगरानी रखना जारी रखेंगे."

सरकारी मेडिकल कॉलेज किलपौक के डीन डॉक्टर आर नारायन बाबू ने बीबीसी को बताया, “हैज़ा या पीलिया जैसी महामारी के कोई संकेत नहीं हैं.”

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सरकार ने किलपौक मेडिकल कॉलेज और रॉयपेट्टा अस्पताल समेत कई संस्थानों से पूरे चेन्नई में 1105 मेडिकल रिलीफ़ कैंप बनाए हैं. तिरुचिरापल्ली और वेल्लोर जैसे ज़िलों से भी यहां मेडिकल कैंप की मोबाइल यूनिटें पहुंच गई हैं.

पश्चिम माम्बलापम के एक छोटे रिहाइशी इलाक़े में मौजूद मोबाइल यूनिट के डॉक्टर इस बारे में बहुत कुछ तो नहीं बताते, यहां आने वाली औरतें और मर्द खांसी, सर्दी, सांस की दिक्कत और पानी में रहने से पैरों में सड़न की शिकायक लेकर आ रहे हैं.

डॉक्टर बाबू बताते हैं, “शिकायत लेकर आने वाले लोगों में अधिकांश बच्चे और बुजुर्ग हैं.”

डॉक्टर के पास आए एक मरीज गनाशेखरन ने बताया, “मुझे बुखार नहीं है, लेकिन मेरे पैरों में घाव हो गया है. डॉक्टर मुझे केवल एक दवा दे रहा है. डॉक्टर का कहना है कि उसके पास इस तरह के घाव के लिए कोई मलहम नहीं है.”

हालांकि तमिलनाडु के दवा बिक्री एसोसिएशन (ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट) के एस रामचंद्रन का कहना है कि दवाओं की कोई कमी नहीं है. कुछ देर हो सकती है क्योंकि गोदामों में भी पानी घुस गया था, लेकिन इस समस्या को लगभग हल कर लिया गया है.

नाम जाहिर न करने की शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “ऐसा इसलिए है क्योंकि जब नवंबर में पहली बारिश हुई, तभी हमने उत्तर पूर्वी मानसून के लिए सबकुछ इकट्ठा कर लिया था. तबसे हम अलर्ट पर ही हैं.”

उन्होंने बताया, “हम बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हैजा या पीलिया का एक भी मामला सामने नहीं आया है.”

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