प्रदूषण: 1 डीज़ल कार=7 पेट्रोल कार

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दिल्ली में निजी वाहनों के सड़क पर चलने के सम विषम फॉर्मूला पर अभी चर्चा हो ही रही थी कि नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने सरकारी विभागों से कहा है कि वे डीज़ल की गाड़ियां न ख़रीदें.

इसके अलावा एनजीटी के निर्देश में कहा है कि दिल्ली में डीज़ल से चलने वाली किसी नई गाड़ी का रजिस्ट्रेशन न किया जाए.

बीबीसी से बातचीत में सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरोन्मेंट (सीएसई) की प्रदूषण विभाग की प्रमुख अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा कि एनजीटी के निर्देश जारी करने में क़ानूनी दिक्कतें हैं.

उनके अनुसार, दिल्ली में डीज़ल गाड़ियों के लिए भारत स्टेज 4 के जो मानक बने हैं, उसके मुताबिक उन्हें क़ानूनी तौर पर पेट्रोल गाड़ियों के मुक़ाबले तीन गुना ज़्यादा नाइट्रोजन ऑक्साइड और पांच से सात गुना ज़्यादा पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) उत्सर्जित करने की छूट मिली हुई है.

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अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि एक डीज़ल गाड़ी लाने का मतलब वो पांच से सात पेट्रोल गाड़ियों के बराबर प्रदूषण फैलाती है.

हालांकि बीजिंग में प्रदूषण को कम करने के लिए इमरजेंसी घोषित किए जाने की ख़बरों के बीच दिल्ली प्रशासन भी सचेत हुआ है और उसने कोयले से संचालित संयंत्रों को बंद करने से लेकर कई उपायों की घोषणा की है.

लेकिन अनुमिता रॉय चौधरी कहती हैं कि सरकार की जो नीति है उसमें डीज़ल पर कम टैक्स लगाते हैं, इसी वजह से दिल्ली और बाक़ी देश में डीज़ल गाड़ियों की संख्या बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है.

वो कहती हैं, “डब्ल्यूएचओ ने डीज़ल गाड़ी से निकलने वाली गैसों को कैंसर पैदा करने वाले हानिकारक तत्वों की प्रथम श्रेणी के कार्सिनोजेन का दर्जा दिया है.”

चौधरी के मुताबिक, “इसका मतलब ये हुआ कि डीज़ल से पैदा होने वाली गैसें और सिगरेट का धुआं एक ही दर्जे में है और इनसे फेफड़े का कैंसर होता है.”

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वो दिल्ली सरकार की सम विषम कार नंबर योजना को बहुत ज़रूरी मानती हैं और कहती हैं कि ये आपात उपाय करना बेहद ज़रूरी हो गया है.

वो बताती हैं, “दिल्ली के बिजली संयंत्रों को बंद करना और निर्माण को कम करने के क़दम उठाए जा रहे हैं लेकिन प्रदूषण का जो सबसे बड़ा स्रोत है, यानी गाड़ियां, उनपर नियंत्रण लाना बेहद ज़रूरी है.”

उनका कहना है कि जब निजी गाड़ियों पर रोक लगाएंगे तभी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए ज़रूरी ढांचा भी बन पाएगा.

अनुमात रॉय चौधरी के अनुसार, दिल्ली में 85 लाख गाड़ियां हैं और हर रोज 1400 नई गाड़ियां सड़कों पर उतर रही हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अऩुसार दुनिया के 20 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में 13 भारत के हैं.

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