पाक नौका मामले में डीआईजी बर्ख़ास्त

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पिछले साल गुजरात के तट से परे, एक पाकिस्तानी नाव में हुए विस्फोट के बाद कुछ दावे करने के मामले में कोस्ट गार्ड के डीआईजी बीके लोशाली को बर्ख़ास्त कर दिया गया है.

लोशाली के ख़िलाफ़ कार्रवाई इस मामले में सरकार के स्टैंड के उलट बयान देने के कारण हुई है.

पीटीआई ने एक वरिष्ठ कोस्टगार्ड के हवाले से कहा, "लोशाली को बर्ख़ास्त कर दिया गया है. उन्हें जांच में दोषी पाया गया है. वरिष्ठ उप महानिदेशक (डीआईजी) स्तर के अधिकारियों के पैनल ने तीन महीने तक मामले की जांच की थी."

31 दिसंबर, 2014 और एक जनवरी, 2015 की रात के दौरान पोरबंदर से 365 किलोमीटर दूर अरब सागर में विस्फोटकों से भरी पाकिस्तान की एक नाव भारतीय समुद्र तटीय सीमा में प्रवेश कर गई थी.

बाद में इसमें आग लग गई थी और चार सवारों सहित ये नाव डूब गई थी.

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रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि परिस्थिति जन्य सबूत से संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान के नाव का आंतकियों से संपर्क था.

रक्षा मंत्री ने इस नाव में समुद्री लुटेरों के होने के दावे को ख़ारिज़ कर दिया.

उन्होंने उन्हें संदिग्ध आतंकवादी बताते हुए कहा कि जब भारतीय नौसेना ने उन्हें पहचान लिया तो उन लोगों ने आत्महत्या के लिए नाव को उड़ा लिया और वे पाकिस्तानी नौसेना के संपर्क में थे.

हादसे के वक्त भी भारत की ओर से अधिकृत तौर पर यही कहा गया था, लेकिन सरकारी राय के उलट लोशाली ने एक बयान में कहा था कि उन्होंने नाव उड़ाने का आदेश दिया था.

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इसके बाद सरकार की काफी किरकिरी हुई थी.

सरकार ने लोशाली को नार्थ वेस्ट सीमा के चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ पद से हटा दिया था. उन्हें गांधीनगर स्थित मुख्यालय में शिफ़्ट कर दिया गया और उनके ख़िलाफ़ जांच बिठाई गई थी.

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