'अतिक्रमण हटाने में नहीं हुई बच्ची की मौत'

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रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि दिल्ली के शकूरबस्ती में रेलवे की ज़मीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीक़े से की गई.

उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान जिस बच्ची की मारे जाने की बात कही जा रही है, उसकी मौत यह कार्रवाई शुरू होने से पहले हो चुकी थी. इसकी पुष्टि दिल्ली पुलिस ने भी की है.

उन्होंने कहा कि ये ख़बरें सच नहीं हैं कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रात में शुरू की गईं. सच यह है कि अतिक्रमण हटाने का काम सुबह दस बजकर 50 मिनट के बाद शुरू किया गया. उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीक़े से की गई.

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रेल मंत्री ने बताया कि दिल्ली में रेलवे की ज़मीन पर से अवैध क़ब्ज़े को शांतिपूर्वक हटाने और उस ज़मीन को सार्वजनिक काम के लिए उपयोग में लाने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर चर्चा के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री को बुलाया है.

दिल्ली के शकूरबस्ती इलाक़े में अतिक्रमण हटाने के दौरान कथित तौर पर एक बच्ची की मौत को लेकर सोमवार को संसद के बाहर और अंदर जमकर हंगामा हुआ.

आम आदमी पार्टी (आप) और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संसद भवन परिसर में गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन किया. प्रदर्शन करने वाले सांसद अपने हाथों में 'रहम करो मोदी सरकार, बंद करो ग़रीबों पर अत्याचार', जैसे नारे लिखे हुए बैनर लिए हुए थे.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शकूरबस्ती का दौरा किया और पीड़ित लोगों से मुलाक़ात की.

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उन्होंने कहा, ''जहां भी कोई झुग्गी-झोपड़ी तोड़ी जा रही है, आप हमें सूचना दीजिए मैं वहां पहुंच कर झोपड़ियों को तोड़े जाने से रोकूंगा और अत्याचार नहीं होने दूंगा.''

उन्होंने कहा कि इन झुग्गी-झोपड़ी वालों को बचाने की ज़िम्मेदारी अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी सरकार की है. लेकिन दोनों सरकारें एक दूसरे पर अारोप लगाने में व्यस्त हैं.

उन्होंंने कहा कि इस तरह से झोपड़ियां तोड़ना ग़लत है. उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाने की बात कही.

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