शरीफ़ की भारत के ख़िलाफ़ न बोलने की नसीहत

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने अपने मंत्रियों से भारत विरोधी बयान नहीं देने को कहा है.

इस बारे में सरकारी तौर पर तो कोई बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से मीडिया में ऐसी ख़बरें हैं.

शरीफ़ ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों से कहा कि भारत के साथ बातचीत का सिलसिला लंबे समय बाद शुरू हुआ है इसलिए कोई भी ऐसा बयान न दें जिससे कि यह बातचीत फिर पटरी से उतर जाए.

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री चाहते हैं कि बातचीत का यह सिलसिला अंजाम तक पहुंचे ताकि दोनों देशों के बीच मुद्दों का समाधान हो सके.

इसे शरीफ़ का समझदारी वाला फ़ैसला माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच रिश्ते अक्सर बयानबाज़ी के कारण ही बिगड़ जाते हैं. बयानों से माहौल ख़राब होता है और असल मुद्दे पीछे छूट जाते हैं.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि शरीफ़ ने अपने मंत्रियों को भारत के ख़िलाफ़ नहीं बोलने की नसीहत दी है. पहले भी ऐसा हो चुका है लेकिन जब बातचीत पटरी से उतरती है तो फिर बयानबाज़ी का सिलसिला दोनों तरफ से शुरू हो जाता है और फिर मामला वहीं पहुंच जाता है.

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समग्र वार्ता का ताज़ा सिलसिला 2008 के बाद शुरू हुआ है और कई स्तरों पर वार्ता आगे बढ़ रही है. ऐसे भी संकेत मिल रहे हैं कि अगले महीने विदेश मंत्रियों की भी मुलाकात हो सकती है. हालांकि इसके लिए अभी तारीख और स्थान तय नहीं हुआ है.

कई बार ऐसे तत्व भी बयानबाज़ी करने लगते हैं जो नहीं चाहते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते पटरी पर आएं. पाकिस्तान सरकार की कोशिश यही है कि इस बार कोई बयान भारत के ख़िलाफ़ न आए.

पिछले अनुभवों को देखते हुए दोनों देशों के क़दम फूंक फूंक कर आगे बढ़ने की ज़रूरत है.

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