कश्मीर में तीन लोग लापता, जवान हिरासत में

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भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा इलाक़े में तीन लोगों को कथित तौर पर ग़ायब करने वाले टेरिटोरियल आर्मी के एक जवान की पुलिस हिरासत अदालत ने 21 दिसंबर तक बढ़ा दी है.

अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने 9 दिसंबर को जवान मंज़ूर अहमद को गिरफ़्तार किया था.

पुलिस तफ़्तीश में पता चला कि मंज़ूर ग़ायब हुए तीन नागरिकों गुलाम जीलानी खटाना, मीर हुस्सियन खटाना और अली मोहमद शेख़ के संपर्क में था.

पुलिस को पता चला कि अभियुक्त जवान ने 17 नवंबर तक ग़ायब लोगों के साथ फ़ोन पर कई बार बात की थी.

15 दिसंबर को सेना के श्रीनगर के जनरल कमांडिंग अफ़सर सतीश दुआ ने मीडिया को बताया कि सेना ने जांच के आदेश दिए हैं.

ग़ायब हुए तीन लोगों के परिजनों ने चार दिन पहले कुपवाड़ा के त्रेहगाम में दिन भर प्रदर्शन किया था.

परिजनों ने आरोप लगाया कि अभियुक्त जवान ने तीनों नागरिकों को पल्लादार की नौकरियां देने का लालच भी दिया था.

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मीर हुस्सियन खटाना की पत्नी सलीमा बेगम ने बीबीसी को बताया,"एक महीने बाद भी कुछ पता नहीं चला. लेकिन मेरे पति कहाँ गए इसकी जानकारी मंज़ूर को है. वही मेरे पति से फ़ोन पर बात करता था. जिस दिन वे मंज़ूर के साथ गए तो मैंने दिन में उनको फ़ोन किया. मेरे पति ने बताया कि हम सब मंज़ूर के साथ हैं. उसके बाद उनका फ़ोन बंद हो गया और अभी तक कुछ भी पता नहीं है. मेरे पांच बच्चे हैं."

पुलिस के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (उतरी कश्मीर) ग़रीब दास ने बीबीसी को बताया,"आरोपी ने माना है कि वह ग़ायब हुए तीन लोगों के संपर्क में था. हमने 17 नवंबर के बाद मुठभेड़ों में मारे गए सभी कथित चरमपंथियों की परिजनों को तस्वीरें दिखाईं, लेकिन परिजनों ने उनमें से किसी को नहीं पहचाना."

2010 में भी कुपवाड़ा सीमा से सटे इलाक़े में तीन आम नागरिक फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए थे. कुछ महीने पहले सेना के कोर्ट मार्शल ने आरोपी सैनिकों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

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