सुधार का मौका दिए बिना कठोर सज़ा कितनी सही?

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जुवेनाइल जस्टिस क़ानून में जघन्य अपराध करने वाले की उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल करने के सवाल पर राय बंटी हुई है.

कुछ लोगों का कहना है कि निर्भया कांड जैसी घटनाओं को देखते हुए उम्र घटाना ज़रूरी है, जबकि दूसरे लोगों का मानना है कि किसी एक घटना के आधार पर क़ानून में इतना अहम फैसला काफ़ी सोच-विचार कर ही होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अरविंद जैन का भी मानना है कि बच्चों के प्रति जो राष्ट्र और समाज की जिम्मेदारी है उसे सिर्फ़ एक मामले पर जनभावनाओं या मीडिया के दबाव में नहीं बदला जा सकता.

उन्होंने कहा कि वाजपेयी सरकार में मंत्री मेनका गांधी ने इस उम्र को 16 से बढ़ाकर 18 साल करवाया था.

भारत में 2014-15 में जितने अपराध हुए हैं उसमें से जुवेनाइल से जुड़े अपराधों का हिस्सा 1.2 प्रतिशत है. हल्ला ये मचाया जा रहा है कि पिछले कुछ सालों में जुवेनाइल से जुड़े जघन्य अपराध बढ़ रहे हैं और इनकी उम्र घटाकर इन्हें भी बालिग़ों की तरह सजा दी जाए.

इन्हें जेल में ख़तरनाक अपराधियों के साथ रखेंगे तो जब ये बाहर निकलकर आएंगे तो निश्चित तौर पर पक्के अपराधी बनकर ही बाहर निकलेंगे.

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दिक्कत ये है कि क़ानून और नीतियां बनने के बावजूद जो नाबालिग़ अपराधी है उनकी शिक्षा, पुनर्वास और सुधार पर जो काम किया जाना चाहिए था, उस तरह के काम बाल सुधार गृहों में नहीं हो रहे हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इन्हें भी बालिग़ अपराधियों की तरह सुधार का मौका दिए बिना फ़ांसी पर लटका दिया जाए.

बाल सुधार गृहों में इन नाबालिग़ अपराधियों की काउंसलिंग की जानी चाहिए. उसमें सुधार की जो-जो संभावनाएं हैं उसके सभी संभव प्रयास किए जाने चाहिए.

हालाँकि तीन साल बाल सुधार गृहों से संबंधित अभी तक कोई ऐसा अध्ययन सामने नहीं आया है कि तीन साल के बाद सुधार गृहों से निकलने वालों में से ऐसे कितने हैं जो वाकई में सुधर गए और कितने अपराध की दुनिया में खो गए.

जहाँ तक नाबालिग़ों के रिकॉर्ड की बात है तो सभी सुधार गृहों में इस तरह के आंकड़े तो हैं कि उनके पास कितने नाबालिग़ आए, कितने समय तक रहे और उन्हें कब छोड़ा गया. लेकिन सुधार गृह से छोड़े जाने के बाद का ट्रैक रिकॉर्ड शायद उनके पास नहीं होता.

यही हाल जघन्य अपराधों के मामले में भी है. इससे जुड़ा कोई आंकड़ा भी रिकॉर्ड में रखा जाता है, कहना मुश्किल है.

जुवेनाइल जस्टिस बिल जो कि अभी राज्यसभा में अटका हुआ है, संभवत उसमें ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिसमें जुवेनाइल्स के अपराध का रिकॉर्ड रखा जाएगा.

(बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्या से बातचीत के आधार पर)

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