भारत की सड़कों पर फ़लस्तीनी संघर्ष की गाथा

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नौजवान फ़लस्तीनी अभिनेताओं का एक दल वहां के संघर्ष के बारे में लोगों को बताने के लिए आजकल भारत के दौरे पर है.

इस समूह का नाम है फ्रीडम थिएटर समूह, जो भारत में नुक्कड़ नाटक करने के लिए मशहूर जन नाट्य मंच के सहयोग से दिल्ली, मुंबई और लखनऊ और कई दूसरे अन्य शहरों में नुक्कड़ नाटक करेगा.

यह थिएटर समूह आजकल दिल्ली के सफदर स्टूडियो में रिहर्सल करने में व्यस्त है. यह दल तीन महीने तक भारत में रहेगा.

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फ्रीडम थिएटर समूह के निदेशक फैसल अबू अलहाज कहते हैं, "हम फ़लस्तीनी संघर्ष के बारे में बताना चाहते हैं. जब लोग फ़लस्तीन के बारे में सोचते हैं तो उनके मन में लड़ाई और संघर्ष की ही छवि उभरती है. हम उन्हें दूसरा पहलू भी दिखाना चाहते हैं. हम सच्ची तस्वीर पेश करना चाहते हैं. हमारे पास कई कहानियाँ हैं जो हम भारतीय दर्शकों के सामने पेश करना चाहते हैं."

फ़लस्तीन से आए मेहमान कलाकार केवल अरबी बोलते हैं और मेजबान कलाकार हिन्दी. मंच पर दो भाषाओं का यह मिश्रण आसान नहीं है.

जन नाट्य मंच के निर्देशक सुधन्वा देशपांडे कहते हैं, "हम नाटक इस अंदाज़ में पेश करेंगे कि देखने वालों को यह महसूस ना हो कि कुछ कलाकार केवल अरबी बोल रहे हैं.''

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वे कहते हैं कि भारत की फ़लस्तीनी संघर्ष के साथ पुरानी सहानुभूति है. लेकिन मध्य पूर्व में अब यह नीति कुछ बदल रही है.

उनका कहना है, "भारत अब इसराइल के नज़दीक जाता दिख रहा है. लेकिन जहां तक लोगों का सवाल है वह पहले की तरह फ़लस्तीनी जनता के संघर्ष के साथ खड़े हैं."

यह थिएटर समूह एक सपना लेकर आया है, जिसे अधिकृत क्षेत्रों में लंबे समय से देखा गया है.

फैसल अबू अलहाज कहते हैं, "हमें आज़ादी और अमन चाहिए. हम एक ऐसे भविष्य का सपना देखते हैं, जहां हम बिना किसी चेक प्वाइंट के आ सकें, काम कर सकें, जहां हमें हर मोड़ पर अपना आईडी कार्ड इसरायली सेना को न दिखाना पड़े."

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