क्या मुझे जान से मरवा देंगे: कीर्ति आज़ाद

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भारतीय जनता पार्टी ने मुझ पर जो कार्रवाई की है, इससे मुझे लगता है कि इन लोगों ने प्रधानमंत्री का अपमान किया है.

मैं चाहूंगा कि वो इस मामले में हस्तक्षेप करें. मैं भाजपा के मार्गदर्शक मंडल से भी चाहूंगा कि वह हस्तक्षेप करे. मैंने क्या ग़लती की है? मैंने तो किसी का नाम भी नहीं लिया है.

डीडीसीए के मामले को मैं पिछले 10 साल से उठा रहा हूं. साल 2013 में दो अक्तूबर को डीडीसीए में शराब बिकी थी, तो वह राष्ट्रीय गौरव का अपमान था.

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इसके ख़िलाफ़ मैंने चिट्ठी लिखी थी. इसके बाद मुझसे कहा गया कि मैं अपनी शिकायत वापस ले लूं. मैंने पार्टी की बात मानते हुए अपनी शिकायत वापस ले ली. मुझसे कहा गया कि हम मिल-बैठकर इस मामले का समाधान करेंगे. लेकिन कुछ नहीं हुआ. मुझे लगता है कि यह मेरी ग़लती थी.

इसके बाद मैं इस मुद्दे को लेकर चौराहे पर आया. पिछले 10 साल से एक व्यक्ति मेरे साथ राजनीतिक खेल खेल रहा है. आज मैं यहां खड़ा हूँ. अगर वो सोचते हैं कि मुझे पार्टी से निकालकर मेरी मुहिम को रोक देंगे, तो मैं यह साफ़ करना चाहूंगा कि खेल में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में मैं रुकने वाला नहीं हूँ. मैं इस लड़ाई को लड़ूंगा.

मैं अब इस लड़ाई को आगे ले जाऊंगा. मैं इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करूंगा. अभी हाल ही में दिल्ली की एक अदालत में मानहानि का जो मामला दायर किया गया है, उसमें अगर मुझे गवाह के तौर पर बुलाया जाता है, तो मैं पेश होऊंगा.

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मुझे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुलाया था. मैंने उनसे कहा कि यह राजनीतिक मामला नहीं है. मैंने उनसे कहा कि अगर यह राजनीतिक मामला है तो आईपीएल और बीसीसीआई भी राजनीतिक मामला होना चाहिए, आखिर उसमें भी तो घोटाला है.

मेरे यह कहने पर पार्टी अध्यक्ष ने मुझसे कहा कि आप रविवार को होने वाली प्रेस कांफ्रेंस को मत करिए. इस पर मैंने उनसे कहा कि आप दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बात कर लीजिए. इस पर उन्होंने मुझसे कहा कि दो दिन इंतज़ार करिए, मैं कुछ करता हूँ. लेकिन दो दिन बाद मेरे पास कोई जवाब नहीं आया. इसके बाद मैंने मीडिया के सामने अपनी बात रखी.

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मुझे किसी व्यक्ति के ज़रिए यह सूचना मिली कि अध्यक्ष जी ने मेरी बात नहीं मानी है. उन्होंने कहा है कि अगर कीर्ति ने बात नहीं मानी तो उसके साथ बहुत बुरा होगा. मैं पूछना चाहता हूं कि अगर मैं बात नहीं मानूंगा तो क्या मुझे जान से मरवा दिया जाएगा.

मेरा आम आदमी पार्टी में जाने का इरादा नहीं है. वह तो अभी कल की पार्टी है. मैं भाजपा से निकला नहीं हूँ बल्कि निकाला गया हूँ. मैं 1993 में भाजपा से तब जुड़ा था, जब इस पार्टी को कोई पूछता नहीं था.

(बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से हुई बातचीत पर आधारित)

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