जब जब शत्रुघ्न ने छोड़े बयानों के बाण

भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा. इमेज कॉपीरइट AFP

भारतीय जनता पार्टी से सांसद कीर्ति आज़ाद के निलंबन के बाद अब एक और सासंद शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर अटकलें लग रही हैं, जो अपने विवादित बयानों से सुर्ख़ियों रहते हैं.

शत्रुघ्न सिन्हा कई बार अपनी पार्टी पर ही निशाना साधने से नहीं चूकते हैं.

आइए नज़र डालते हैं शत्रुघ्न सिन्हा के ऐसे ही दस प्रमुख बयानों पर जो उन्होंने ट्विटर पर लिखे-

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कीर्ति आज़ाद आज के हीरो हैं. दोस्तों से विनम्र निवेदन है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले दोस्त के विरुद्ध कठोर प्रतिक्रिया न दें.

और उन वयस्कों का क्या जिन्होंने निर्भया के साथ बर्बरता की थी, जो जेल में हैं जिन्होंने अपील कर रखी है और तीन साल से कोई सुनवाई नहीं हुई है.

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वित्त मंत्री के तौर पर उन्हें (अरुण जेटली को) इस मुद्दे को क़ानूनी रूप से नहीं राजनीतिक तरीक़े से लड़ना चाहिए, जैसा कि हमारे डैशिंग-डायनामिक प्रधानमंत्री ने सलाह दी है कि उन्हें आडवाणी जी का अनुसरण करना चाहिए.

मैंने न्यूटन के गति के तीसरे नियम का अक्सर ज़िक्र किया है. लगता है कि असमय की गई कार्रवाई से पार्टी को ही नुकसान हो सकता है. दुख की बात है कि सबसे अलग पार्टी अब मतभेदों की पार्टी बन गई है.

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समारोह में नहीं आ सकूंगा लेकिन नीतीश बाबू और लालूजी, मैं आपका शुभचिंतक और दोस्त ही रहूंगा. दोस्ती हमेशा के लिए होती है.

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मैं बिहार में विकास के मसीहा 'सुशासन' बाबू का मुख्यमंत्री के तौर पर स्वागत करता हूं और बिहार में भारी जीत के लिए जननेता लालूजी को बधाई देता हूं.

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पूर्व गृह सचिव और बिहारी गौरव आरके सिंह सही हैं. हमें फटकार लगाने का दम (या डीएनए) किसी में नहीं है.

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करारी शिकस्त के लिए जो लोग ज़िम्मेदार हैं, उन्हें जबाव देना चाहिए क्या हुआ, क्यूं हुआ, कहां और कैसे हुआ. उन्हें भाजपा के सही मायने में वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करना चाहिए.

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मैं कोई राज्यसभा का सांसद नहीं हूं. मैं जनता के समर्थन से आया हूं और मैंने रिकॉर्ड मार्जिन से दो बार लोकसभा का चुनाव जीता है. मेरे पर आधार है.

पूरी गंभीरता और प्रयासों के बावजूद बिहारी बाबू को प्रचार से दूर रखा गया. मेरे दोस्तों, मतदाताओं और समर्थकों को नीचा दिखाया गया.

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लोग विजयवर्गीय की टिप्पणी पर मेरी प्रतिक्रिया जानना चाहते हैं. मेरी प्रतिक्रिया है- हाथी चले बिहार...भौंकें हज़ार

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ऐसा लगता है कि बिहारी बनाम बाहरी का मुद्दा हमेशा के लिए निपट गया है.

ये लोकतंत्र और बिहार के लोगों की जीत है. मैं उन्हें सलाम करता हूं.

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जहां तक प्रचार की बात है, मोहब्बत करने वाले कम ना होंगे, तेरी महफ़िल में लेकिन हम ना होंगे, सिद्धांत की बात है.

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