राम मंदिर पर चुनावी 'सियासत के दांव'

अयोध्या, हिंदू

लोगों को खुले तौर पर अयोध्या के अधिगृहीत परिसर में यथास्थिति बनाए रखने के अदालत के फ़ैसले का लिहाज़ है. लेकिन लगता है कि सियासी मोर्चे पर योजनाबद्ध ढंग से राममंदिर मुद्दे को यूपी चुनावों तक गर्माने की कोशिश हो रही है.

यहां के मठों, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, बाबरी मस्जिद के पैरोकारों और खुद उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार में चल रही गतिविधियों से यही लगता है.

सियासत को मंदिर और चुनाव के गिर्द घुमाने का ख़ाका खींचा जा रहा है.

ख़ुद सपा सरकार में ही मंत्री का दर्जा प्राप्त नेता ओमपाल नेहरा ने राम मंदिर के लिए मुसलमानों से कारसेवा की अपील की, जिस कारण से उन्हें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को हटा दिया.

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नेहरा ने बिजनौर में मुसलमानों से कहा था कि अगर मुसलमान अयोध्या और मथुरा में मंदिर बनवाने में मदद करें, तो विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन ख़ुद-ब-ख़ुद ख़त्म हो जाएंगे.

मुलायम सिंह यादव के क़रीबी समझे जाने वाले नेहरा को अक्तूबर में ही मनोरंजन कर विभाग में सलाहकार बनाकर लालबत्ती दी गई थी.

अयोध्या में प्रशासन का इम्तिहान अगली चार जनवरी (पौष शुक्ल तृतीया) को होने वाला है.

राम जन्मभूमि सेवा समिति ने उस दिन अधिगृहीत परिसर में रामलला के सामने कलश स्थापना कर नौ दिन का अनुष्ठान शुरू करने की अनुमति रिसीवर यानी मंडलायुक्त से मांगी है.

यह समिति 12-13 दिसंबर 1949 की आधी रात विवादित स्थल पर रामलला की मूर्ति प्रकट होने की याद में हर साल पौष शुक्ल तृतीया को राम प्रकटोत्सव मनाती है.

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इससे पहले हर साल रामलला के पुजारी परिसर से बाहर आकर समिति का कलश ले लेते थे और फिर नौ दिन बाद वापस लौटा देते थे.

समिति के अध्यक्ष महंत रामचरित्रदास का कहना है कि कलश रामलला के सामने स्थापित नहीं किया जाता था. "अब हम फिर से धोखा खाने को तैयार नहीं हैं."

अप्रैल के मध्य में उज्जैन में कुंभ शुरू हो रहा है. राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष, मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास का कहना है कि कुंभ में देशभर के साधु संतों की बैठक में मंदिर निर्माण के मुद्दे पर बात होगी.

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उन्होंने कहा, ''इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय लेकर सभी धर्माचार्य मिलेंगे और मंदिर निर्माण की कठिनाइयां दूर करने को कहेंगे. अभी वे देश की अन्य बड़ी समस्याओं में उलझे हैं, इसलिए हम कुछ नहीं कह रहे हैं.''

न्यास के ही एक सदस्य और पूर्व भाजपा सांसद रामविलास वेदांती कह रहे हैं कि आरएसएस यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मंदिर निर्माण शुरू कराना चाहता है.

आरएसएस के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे नंदकुमार कह रहे हैं कि मंदिर निर्माण के लिए कोई समय तो नहीं तय किया गया है, लेकिन यह भविष्य में ज़रूर बनेगा.

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बयानों और गतिविधियों से लग रहा है कि मामला कोर्ट में होने के कारण आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जाएगा लेकिन मामले को ठंडा भी नहीं होने दिया जाएगा.

बाबरी मस्जिद के पैरोकार मुसलमानों में भी इसकी प्रतिक्रिया दिखाई देने लगी है.

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुक़दमे में एक पक्षकार, अयोध्या की अंजुमन मुहाफ़िज़ मुक़ाबिल मसाजिद, अवध के सदर हाजी महबूब का कहना है कि "हम अदालत का फ़ैसला मानने को तैयार हैं, लेकिन जब हद हो जाएगी तो हम भी विश्व हिंदू परिषद की तरह मस्जिद बनवाने के लिए यहां ईंटें मंगाने लगेंगे."

हाजी महबूब ने कहा, विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों की सक्रियता का एक ही मक़सद है यूपी के अगले चुनाव में धार्मिक ध्रुवीकरण. इसीलिए इस मुद्दे को ज़िंदा किया जा रहा है.

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