'कांग्रेस दर्शन' के संपादक सुधीर जोशी बर्ख़ास्त

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समाचार एजेंसी पीटीआई और अन्य भारतीय अख़बारों के मुताबिक़, मुंबई से छपने वाले कांग्रेस के मुखपत्र 'कांग्रेस दर्शन' में छपे एक लेख पर विवाद के चलते इसके कंटेन्ट संपादक सुधीर जोशी को बर्ख़ास्त कर दिया गया है.

इससे पहले पत्र के एडिटर इन चीफ़ संजय निरुपम ने इस लेख के लिए माफ़ी मांगी जिसमें कांग्रेस पार्टी की मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर विवादास्पद टिप्पणी की गई है.

संजय निरुपम, जो मुंबई कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने ख़ुद को इस विवादित लेख से अलग करते हुए कहा था कि इस ग़लती के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

'कांग्रेस की कुशल सारथी सोनिया गांधी' शीर्षक से लिखे लेख में कहा गया है, "उनके(सोनिया गांधी) पिता स्टेफ़िनो मायनो इटली के फ़ासिस्ट नेता मुसोलिनी के सहयोगी और एक भूतपूर्व फ़ासिस्ट सिपाही थे जिनका निधन 1983 में हुआ."

लेख में ये भी कहा गया है कि सोनिया गांधी पहले एयर होस्टेस बनना चाहती थीं. सोनिया गांधी के बारे में लिखा गया है कि राजीव गांधी से शादी के 16 साल बाद उन्होंने भारत की नागरिकता ली थी.

उनके अध्क्ष बनने के बारे में कहा गया है कि कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता लेने के केवल 62 दिनों में वो पार्टी की अध्यक्ष बन गईं थीं.

भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि (15 दिसंबर, 1950) के मौक़े पर उनको श्रद्धांजलि देने के लिए उनपर विशेष लेख लिखे गए थे. लेकिन ये पत्रिका उसी समय बाहर आई जब 28 दिसंबर को कांग्रेस अपना 131वां स्थापना दिवस मना रही थी.

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पटेल पर लिखे एक लेख में जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी की भी आलोचना की गई है. इस लेख में नेहरू पर विदेश मामलों में पटेल की सलाह नहीं मानने का आरोप लगाया गया है.

बग़ैर किसी बाइलाइन के इस लेख में कहा गया है कि अगर सरदार पटेल की बात मानी जाती तो कश्मीर, चीन, तिब्बत और नेपाल के हालात आज जैसे नहीं होते.

लेख में कांग्रेस के अतीत पर रोशनी डालते हुए ये भी कहा गया है कि ज़्यादातर प्रदेश समितियां पटेल को प्रधानमंत्री बनाए जाने के पक्ष में थीं, लेकिन गांधी जी की इच्छा को देखते हुए नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया था.

कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री नसीम ख़ान ने इस मामले में संजय निरूपम के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस के पद पर बैठकर कोई अगर आरएसएस की विचारधारा थोपना चाहता है तो उसपर कार्रवाई होनी चाहिए.

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