'फ़ेसबुक के फ़्री बेसिक में फ़्री मार्केटिंग चाल है'

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भारत के 50 प्रमुख शिक्षाविदों ने फ़ेसबुक के फ़्री बेसिक प्लान की आलोचना की है और कहा है कि इसमें 'बड़ी गड़बड़ियां' हैं.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय विज्ञान संस्थान के 50 प्रोफ़ेसरों का कहना है कि इस प्लान से देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता सीमित हो जाएगी.

फ़ेसबुक कुछ सीमित आधारभूत इंटरनेट सुविधाओं को कुछ क्षेत्रों में भारतीयों को मुफ़्त मुहैया कराना चाहता है.

लेकिन आलोचकों का ही कहना है कि फ़ेसबुक की फ़्री बेसिक सेवा नेट न्यूट्रेलिटी के ख़िलाफ़ काम करती है.

'फ़्री बेसिक्स' लागू कराने के लिए फ़ेसबुक का जिस मोबाइल नेटवर्क से समझौता हुआ था, उस पर भारतीय टेलीकॉम नियामक ट्राई ने रोक लगा दी.

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नेट न्यूट्रेलिटी आंदोलन के पक्षधरों का कहना है कि सस्ती दरें या तेज़ पहुँच (स्पीड) के सुझाव के साथ डेटा देने वालों को किसी ख़ास सर्विस का समर्थन नहीं करना चाहिए.

शिक्षाविदों ने एक वक्तव्य में कहा कि फ़्री बेसिक प्लान 'एक घातक योजना है जिससे भारतीयों की स्वतंत्र तरीके से इंटरनेट इस्तेमाल करने की सार्वजनिक सुविधा पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगी.'

प्रोफ़ेसरों का कहना है कि फ़ेसबुक की फ़्री बेसिक योजना में तीन मुख्य कमियां हैं:

  1. फ़ेसबुक ने 'बेसिक' या आधारभूत सुविधा की परिभाषा पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है. अपने 'आघारभूत' एप्स की जानकारी को फ़ेसबुक अपने सर्वर पर डीक्रिप्ट कर सकेगा. इससे होने वाला नुक़सान आम आदमी नहीं देख पाएगा क्योंकि ये तकनीकी मामला है, लेकिन आगे चलकर इसके चिंताजनक परिणाम हो सकते हैं.
  2. 'फ़्री बेसिक' में 'फ्री' शब्द का इस्तेमाल मार्केटिंग करने या इसे बेचने की एक चाल है.
  3. यदि फ़ेसबुक इस बात का निर्णय लेता है कि किस चीज़ का दाम क्या होगा, तो इससे भारतीय लोग डिजिटल दुनिया में अपनी स्वतंत्रता खो देंगे और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था फ़ेसबुक के हाथ चली जाएगी.
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ग़ौरतलब है कि फ़ेसबुक अपने इस प्लान का ख़ूब प्रचार कर रहा है और भारतीय अख़बारों में और टीवी पर इसके ख़ासे विज्ञापन दिए जा रहे हैं.

इंटरनेट पर भी अनेक यूज़र इसके पक्ष में पेटीशन पर हस्ताक्षर कर इसे शेयर या फ़ॉर्वर्ड कर रहे हैं. हालाँकि ये स्पष्ट नहीं है कि इसकी पेचीदगी कितने लोग जानते हैं.

फ़ेसबुक का कहना है कि वह फ़ेसबुक से अधिक सर्विसेस भी जुड़ने देगा, लेकिन इसके संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने चेतावनी दी थी कि 'पूरे इंटरनेट को फ़्री में मुहैया करवा पाना व्यावहारिक नहीं है.

नेट न्यूट्रालिटी के मामले पर नियामक संस्था ट्राई जनवरी में सुनवाई करेगी.

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