तो फिर 2015 का भक्त ऑफ़ द ईयर कौन?

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साल 2015 के ख़त्म होने में अभी कुछ समय बाकी है और लोग साल 2015 की अच्छी, बुरी और अभूतपूर्व यादें ताज़ा कर रहे हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर लोग साल 2015 के भक्त को ढ़ूंढ़ने में जुट गए हैं.

भारत में ट्विटर पर Happy New Year 2016 के साथ-साथ ट्रेंड कर रहा है हैशटैग #Bhaktoftheyear जिसके साथ लोग ले रहे हैं चुटकियां.

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गौरव पांढी ने प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर को पलट कर आमने सामने लगाया है और लिखा है “पीएम मोदी अपने सबसे बड़े प्रशंसक के साथ.”

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श्रावणी लिखती हैं, “यह अवार्ड किसी और को नहीं सिर्फ़ केजरीवाल को जाता है. वे पीएमओ के ख़िलाफ़ ही बोलते रहते हैं... वे अब भी मोदी से ही आसक्त हैं.”

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कांग्रेस के नेता संजय झा का इशारा रात के टीवी शोज़ की और है, और वो लिखते हैं, “मेरा वोट उस आदमी को जाता है जो रोज़ रात 9 बजे प्राइम टाइम में ढोंग करता है, वह भी देश के हित में.”

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इमैनुयल इस अवार्ड के लिए चुनते हैं दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा की सीएम पद की उम्मीदवार किरण बेदी को. वो लिखते हैं, “मोदीजी के जुमलों को तीन डायरियों में लिखने के लिए और दूसरे भक्तों को शर्मसार करने के लिए.”

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सैय्यद मक़बूल फ़ोटोशॉप के लिए यह अवार्ड देते हैं सरकार के पीआईबी को. वो लिखते हैं, “फोटोशॉप में भक्तगिरी का अवार्ड चेन्नई बाढ़ के हवाई सर्वेक्षण के चित्र को फोटोशॉप करने के लिए दिया जाना चाहिए.”

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द्विपायन मित्रा इसके लिए चुनते हैं अनुपम खेर को. वो कहते हैं, “प्रॉक्सी पीएम की भूमिका में उन्हें महारत हासिल है. यह अवार्ड उन्हें मिलना चाहिए.”

अनुपम खेर ने इस साल देश में बढ़ती असहिष्णुता का विरोध कर रहे लेखकों और कलाकारों के ख़िलाफ़ दिल्ली में एक मार्च का नेतृत्व किया था.

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अंशुल सक्सेना के अनुसार यह अवार्ड मिलना चाहिए कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री वी नारायणसामी को. वो कहते हैं, “नारायणसामी ने राहुल गांधी के चप्पल उठा रखे थे और कह रहे थे कि उन्हें इस पर गर्व है.”

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निखिलेश सिंह इसके लिए चुन रहे हैं केंद्र में मोदी सरकार को. उनका कहना है, “अगर मोदी सरकार को सहारा रेगिस्तान की हुकूमत दे दी जाए तो वहां भी 5 साल बाद रेत की कमी हो जाएगी.”

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