98 साल का एनआरआई क़ैदी

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ब्रिटेन से आए तीन एनआरआई, जिनमें एक लकवाग्रस्त हैं, क़रीब 98 साल के बुज़ुर्ग अपने रिश्तेदार के साथ हत्या के आरोप में कपूरथला की जेल में हैं.

गिरफ़्तार लोगों की उम्र 75 से 98 साल के बीच है. इस मामले की जड़ में ज़मीन का विवाद है.

ऐसे क़िस्से पंजाब में नए नहीं हैं. मामला पिछले साल नवंबर का है पर इस कहानी की शुरुआत क़रीब चार दशक पहले हुई थी, जब जालंधर के सलारपुर गांव के बुजा राम काम के सिलसिले में ब्रिटेन गए थे.

बुजा राम 11 साल बाद लौटे और अपने गांव में 21 एकड़ ज़मीन ख़रीदी. बुजा राम ने अपने भाइयों ठाकुर दास और मोती राम को चार-चार एकड़ ज़मीन उपहार में दी.

इसके अलावा उन्होंने सबसे छोटे भाई मोती राम को अपनी 13 एकड़ ज़मीन की देखरेख का ज़िम्मा भी सौंप दिया.

समय के साथ बुजा राम और मोती राम दोनों गुज़र गए. पिछले महीने बुजा राम के तीन बेटे महिंद्र पाल, रेशम चंद और पाल राम अपने पैतृक गांव सलारपुर आए.

वहां उन्होंने पिता की ज़मीन का सीमांकन करना चाहा, जिसकी देखरेख मोती राम के बेटे लक्ष्मण दास, हरबिलास और शिंगारा चंद कर रहे थे.

इस सिलसिले में पांच नवंबर को रेशम चंद और पाल राम अपने चाचा ठाकुर दास और कुछ रिश्तेदारों के साथ मोती राम के बेटों से मिले.

ठाकुर दास के पोते बलबीर सिंह का दावा है कि मोतीराम के बेटों की बुजा राम के बेटों से कहासुनी हुई जो मारपीट में बदल गई. बलवीर सिंह के मुताबिक़ दुर्घटनावश छीना-झपटी में किसी व्यक्ति की रिवॉल्वर से चली गोली शिंगारा चंद को लगी और उनकी मौक़े पर ही मौत हो गई.

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लेकिन पुलिस में दर्ज मोती राम के बेटे लक्ष्मण दास की शिकायत कुछ और है.

लक्ष्मण दास के अनुसार उनके भाई (हर बिलास और शिंगारा चंद) कुएँ से पानी ला रहे थे, जब रेशम चंद, पाल राम और महिंद्र पाल कुछ और लोगों के साथ आए और गोलियां चलानी शुरू कर दीं. उनके साथ गए लोगों में से एक की रिवॉल्वर से निकली गोली शिंगारा चंद को लगी.

शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307,324, 148, 149 के तहत केस दर्ज किया और तीन ब्रितानी नागरिकों समेत 11 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

एसपी अमरीक सिंह पवार के मुताबिक़, "तीन अफ़सरों की टीम बनी है, ताकि मामले की जांच हो सके. जल्द ही हम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगे."

ब्रितानी नागरिक महिंद्र पाल लकवाग्रस्त हैं. उनके रिश्तेदारों का दावा है कि वारदात के समय वह घटनास्थल पर नहीं बल्कि अपने घर में थे.

बुजा राम और मोती राम के भाई ठाकुर दास, जिनकी उम्र क़रीब सौ साल है, भी इस इस मामले में गिरफ़्तार 11 लोगों में शामिल हैं.

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ठाकुर दास के पोते बलबीर सिंह का दावा है कि पुलिस ने सभी को ग़लत ढंग से फंसाया है. उन्होंने डीजीपी समेत अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर मामले की गहराई से जांच का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा कि उनके दादा ठाकुर दास ज़मीन के सीमांकन के लिए गए थे लेकिन, "पुलिस ने तथ्यों की ठीक से जांच किए बिना आईपीसी के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर दिया."

पंजाब की संस्था एनआरआई सभा ऐसे विवादों से निपटने के क़ानूनी विकल्पों पर प्रवासी भारतीयों की मदद करती है.

सभा के अध्यक्ष जसबीर सिंह गिल कहते हैं कि 2014 में उनके पास 100 मामले आए थे जिनमें 50 सुलझा लिए गए हैं. अक्टूबर 2015 तक उनके पास रेवेन्यू से जुड़े 50 केस आए हैं, जिनमें 34 सुलझाए लिए गए.

वह बताते हैं कि अक्सर विदेशों में बसने वाले और नागरिकता लेने वाले पंजाबी अपने पैतृक स्थान में ज़मीन ख़रीदते हैं और उसका क़ब्ज़ा अपने रिश्तेदारों को दे देते हैं, जिसके बाद उनसे विवाद शुरू हो जाता है.

एनआरआई समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए 2004 में पंजाब पुलिस मुख्यालय में एक एनआरआई विंग बनी थी.

यह विंग संपत्ति की धोखाधड़ी, टैक्सी ड्राइवरों की लूट, दोस्तों और रिश्तेदारों से दीवानी विवाद और शादी की समस्याएं देखती है.

अगस्त 2013 में एनआरआई सेल को बढ़ाकर पूरी तरह एनआरआई और महिला विंग में बदला गया. एनआरआई मामलों से निपटने के लिए 15 एनआरआई पुलिस स्टेशन हैं.

एनआरआई विंग प्रभारी एआईजी कंवलदीप सिंह बताते हैं कि कई जगह इन थानों की अलग इमारतें हैं. उन्होंने दावा किया कि विंग राजस्व से जुड़े 70 फ़ीसदी मामले सुलझाती है.

हालांकि पुलिस ख़ुद एनआरआई से जुड़े मामलों का संज्ञान नहीं लेती बल्कि शिकायतकर्ता को उनके पास आना होता है.

इस बीच लंदन में रह रहे महिंद्र पाल के बेटे राज पनेसर ने एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है, जिसमें वह हस्ताक्षरों के ज़रिए निर्दोषों की रिहाई में मदद मांग रहे हैं.

इसमें कहा गया है कि उनकी मां बुज़ुर्ग हैं और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है. पुलिस ने ये नहीं बताया है कि वो अपनी जांच रिपोर्ट कब सौपेंगी.

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