'बर्धन से दृढ़ता-सादगी सीखने की ज़रूरत'

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मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने एबी बर्धन के निधन को वामपंथी आंदोलन के लिए एक बड़ा नुक़सान बताया है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के पूर्व महासचिव एबी बर्धन का शनिवार को दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में निधन हो गया था.

बर्धन के निधन के बाद देश में वामपंथी आंदोलन के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय ने येचुरी से बात की.

येचुरी ने कहा कि बर्धन की बहुत बड़ी कमी महसूस होगी. उनका जाना वामपंथी आंदोलन और देश में जनवादी, धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए यह एक बहुत बड़ा नुक़सान है.

उन्होंने कहा, "दुनिया और देश की परिस्थियों में हमारे पास बहुत बड़ी चुनौतियां हैं. देश में सांप्रदायिक ख़तरा बढ़ रहा है, उदारवादी आर्थिक नीतियां अपनाई जा रही हैं और जनता के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है. ऐसे में बर्धन के 50 सालों का अनुभव हमारे साथ न होना एक बहुत बड़ी कमी रहेगी."

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येचुरी के मुताबिक़ कई दशकों से देश की राजनीति को वामपंथी मोड़ देने में बर्धन की बड़ी भूमिका थी और अब उनके काम को आगे बढ़ाना हमारा फ़र्ज़ है.

उन्होंने कहा, "हम कामरेड बर्धन को लाल सलाम कहेंगे और हमारा यही संकल्प रहेगा कि उनके उद्देश्यों को आगे ले जाएं".

बर्धन के साथ अपने अनुभवों को याद करते हुए येचुरी ने बताया कि उनके अंदर एक विचारधारा और सामाजिक परिवर्तन को आगे ले जाने की जो दृढ़ता थी वह एक बहुत बड़ा गुण था, जिसे हम सबको सीखने की ज़रूरत है.

येचुरी ने कहा कि इतना बड़ा नेता होने के बावज़ूद बर्धन ने जिस सादगी से अपनी ज़िंदगी बिताई वह इस बात का संकेत है कि राजनीति का मतलब स्वार्थ नहीं होता है, इसका मतलब जनसेवा और राजनीतिक परिवर्तन है.

बर्धन के निधन पर सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल अंजान ने बीबीसी को बताया कि वो नागपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष थे और स्वाधीनता आंदोलन में भी शामिल हुए.

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अंजान के मुताबिक़ वामपंथी आंदोलन से प्रभावित होकर बर्धन कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए.

उन्होंने कहा, "एबी बर्धन भारत के बिजली कर्मचारियों के पसंदीदा नेता थे. वो ऑल इंडिया डिफ़ेन्स इम्पलॉइज़ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष, महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी फ़ेडरेशन और ऑल इंडिया इलेक्ट्रिक इम्पलॉइज़ फ़ेडरेशन के अध्यक्ष रहे थे."

अंजान के बताया कि जिस ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना लाला लाजपत राय ने की थी, एबी बर्धन उसके महामंत्री भी रहे थे. वह कई साल तक महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य भी रहे थे.

बर्धन बारह साल तक सीपीआई के महासचिव रहे. अंजान ने बताया कि भारत-अमरीका परमाणु समझौते के विरोध में बर्धन के महासचिव रहते पार्टी ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस लिया गया था.

उन्होंने कहा कि बर्धन ने देश में सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ बड़ी भूमिका निभाई थी.

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