'लाहौर दौरे के बाद पठानकोट जैसा हमला होना ही था'

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पठानकोट स्थित भारतीय वायु सेना के बेस पर हुए हमले को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाहौर दौरे से जोड़ कर देखा जा रहा है.

भारत में बहुत से लोग हमले के बाद प्रधानमंत्री की आलोचना कर रहे हैं.

शनिवार को को इस हमले के बाद ट्विटर पर #Pathankot तेज़ी से ट्रेंड करने लगा.

शनिवार को पांच बंदूकधारियों ने पठानकोट में भारतीय वायुसेना के एयरबेस पर हमला किया.

अधिकारियों के अनुसार सेना की जबावी कार्रवाई में सभी पांच हमलावर मारे जबकि इस दौरान तीन सुरक्षाकर्मियों को भी जान गंवानी पड़ी.

ये हमला ऐसे समय में हुआ है जब हफ़्ते भर पहले ही भारतीय प्रधानमंत्री ने लाहौर का दौरा किया था.

ट्विटर पर लोग इस हमले को नरेंद्र मोदी की कूटनीति की हार बता रहे हैं.

मशहूर पत्रकार शेखर गुप्ता ने ट्वीट किया, "लाहौर के बाद पठानकोट जैसा हमला होना ही था. यह पुराना ट्रेंड है. भारत को यह तय करना होगा कि वह ठगोें की वजह से बातचीत एक बार फिर टलने देगा या नहीं."

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फ़िल्मकार शिरीष कुंदर ने लिखा, "औचक दौरे का नवाज़ शरीफ़ का तरीका है पठानकोट हमला."

पत्रकार सदानंद धुमे ने ट्वीट किया, "यदि पठानकोट हमले की जड़ें पाकिस्तान में हैं तो मोदी के लिए अच्छे विकल्प नहीं हैं. वे बातचीत करें और कमज़ोदर दिखें. दूसरी ओर वे बातचीत रद्द करें और लाहौर दौरा बेवकूफ़ी भरा क़दम लगे."

ट्विटर के कुछ यूजर्स ने मोदी को सलाह दी है कि पाकिस्तान से बातचीत न की जाए.

आनंद शुक्ला ने ट्वीट कर कहा कि भारत में 'आतंकवाद' रोकने का एक मात्र तरीका यह है कि 'दुश्मन' से हर तरह की बातचीत रोक दी जाए.

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हालांकि ज़्यादातर यूजर्स ने हमले के लिए पाकिस्तान की आलोचना की है, पर कुछ लोगों ने भारत और पाकिस्तान से यह अपील भी की है कि वे चरमपंथ से लड़ने के लिए एकजुट हो जाएं.

सुधींद्र कुलकर्णी ने ट्वीट किया, "पठानकोट से साफ़ हो गया है कि साझा दुश्मन के ख़िलाफ़ विश्वास पर आधािरत भारत-पाकिस्तान संयुक्त चरमपंथ विरोधी प्रक्रिया अपनाई जाए."

पत्रकार सागरिका घोष ने लिखा, "पठानकोट हमले के बावजूद सरकार को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए. चरमपंथियों को एजेंडा तय मत करने दीजिए."

आदि ने ट्वीट किया कि "दोनों देशों को चरमपंथ के ख़िलाफ़ साथ साथ लड़ना चाहिए ताकि पेशावर या पठानकोट जैसा हमला फिर न हो सके."

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