चौक पर पहुंचा तो नज़ारा बिल्कुल अलग था..

अशोक मेहता

पंजाब के पठानकोट एयरबेस के क़रीब दुकान चलाने वाले अशोक मेहता को रात को पौने तीन बजे उनके दोस्त ने फ़ोन करके बताया था कि एयरफ़ोर्स स्टेशन के अंदर फ़ायरिंग हुई है.

मगर उन्होंने इस पर यक़ीन नहीं किया था. बाद में हुए ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों की कार्रवाई में चार हमलावर मारे गए थे.

अशोक मेहता ने पठानकोट में मौजूद बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव को बताया कि उन्होंने मौक़े के पास क्या देखा, पढ़ें-

शुक्रवार की शाम से ही सुरक्षाबलों ने एयरबेस की दीवार से लगती दुकानों को बंद करवाना शुरू कर दिया गया था. धीरे-धीरे दूसरे बाज़ार भी बंद होने लगे.

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दुकानदार दुकानें बंद करके अपने घरों को चले गए और आठ बजे के बाद चारों तरफ़ सन्नाटा छा गया था.

रात को पौने तीन बजे मेरे एक दोस्त का फ़ोन आया और उन्होंने बताया कि एयरफ़ोर्स स्टेशन के अंदर फ़ायर हुआ है. मैंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता.

तीन बजे उसने फिर फ़ोन करके गोलीबारी का आवाज़ सुनाई. मैंने कहा कि अंधेरा छँटने के बाद मैं वहां जाता हूं. पांच बजे जब मैं इस चौक पर पहुंचा, तो यहां का नज़ारा पूरी तरह बदला हुआ था.

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बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मीडिया वहां पहुंचा था. साढ़े सात बजे तक स्थिति और गंभीर हो गई थी. नीचे ज़बर्दस्त गोलीबारी चल रही थी और आसमान में हेलीकॉप्टर मंडरा रहे थे. हेलीकॉप्टर से भी गोलीबारी हो रही थी.

थोड़ी देर में हमें पता चला कि तीन हमलावर मारे गए हैं. ठीक नौ बजे चौथे हमलावर के भी मारे जाने की भी जानकारी मिली.

शनिवार को अधिकांश दुकानें दिनभर बंद रही. मीडियाकर्मियों के मोबाइल चार्ज करने के लिए कुछ दुकानें खुली. मैंने भी इसी मक़सद से कुछ देर अपनी दुकान खोली.

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आज हमने दुकानें खोली हैं लेकिन स्थिति जैसी की तैसी है. सुबह पौने नौ बजे मैंने फिर फ़ायर की आवाज सुनी है. हेलीकॉप्टर अब भी आसमान में मंडरा रहे हैं.

मैं 26 साल से यहां दुकान चला रहा हूं लेकिन इतनी सुरक्षा मैंने पहले कभी नहीं देखी. अगर प्रशासन पहले से अलर्ट रहता, तो आज स्थिति कुछ और होती.

दीनानगर हमले के बाद चौकसी बढ़ाने की ज़रूरत थी. एसपी की गाड़ी किडनैप होने की ख़बर आग की तरह फैली थी. तब भी अगर सुरक्षा बढ़ाई गई होती तो यह स्थिति नहीं होती.

(बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव के साथ बातचीत पर आधारित)

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