राजनीतिक वनवास से वापसी करेंगे येदुरप्पा

इमेज कॉपीरइट PTI

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी नेता बीएस येदुरप्पा के ख़िलाफ़ दायर 15 एफ़आईआर निरस्त कर दी हैं.

यह भाजपा और येदुरप्पा के लिए बड़ी राहत है, हालांकि उनकी मुश्किलें अभी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई हैं.

ये केस भारत सरकार की ओर से कैग की जानकारी के आधार पर दर्ज कराया गया था, जिसमें कहा गया था कि बैंगलोर डेवेलपमेंट अथॉरिटी (बीडीए) द्वारा भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना रद्द करने में अनियमितता बरती गई थी.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कैग के वकील की दलीलों से मूल रूप से सहमति जताई कि क़ानूनन उनकी जानकारी पर कार्यवाही ससंद और विधानसभा के विशेषाधिकार में आता है.

कन्नड़ टीवी चैनल पब्लिक टीवी के मैनेजिंग डायरेक्टर और राजनीतिक विश्लेषक एचआर रंगनाथ ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''इससे साफ़ है कि राजनीतिक तौर पर येदुरप्पा का फिर से राज्य में पार्टी अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ़ हो गया है. येदुरप्पा को सहारा देना भाजपा की ज़रूरत है, नहीं तो पार्टी का भविष्य प्रभावित होगा.''

रंगनाथ आगे बताते हैं, ''लेकिन उन्हें अभी भी अपना केस लड़ना होगा. इन मामलों से उन्हें थोड़े समय के लिए राहत ज़रूर मिल गई है और यह उनकी राजनीतिक वापसी में भी मददगार होगा.''

इमेज कॉपीरइट PTI

रंगनाथ दरअसल अन्य मामलों की बात कर रहे हैं, जिसमें एक सीबीआई की विशेष अदालत के सामने है और अन्य मामलों में सुनवाई के विभिन्न चरणों में हैं.

येदुरप्पा को इन मामलों के चलते ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था, हालांकि उनकी अगुवाई में ही पार्टी 2008 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर सरकार बनाने में कामयाब हुई थी.

येदुरप्पा सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से पहले कर्नाटक को भारतीय जनता पार्टी के लिए दक्षिण भारत में प्रवेशद्वार माना जाता था.

प्राथमिक तौर पर येदुरप्पा पर तीन सेट में मामले दर्ज कराए गए. पांच मामलों का पहला सेट सृजन भाषा और अन्य की ओर दर्ज कराया गया था. इनके बाद तत्कालीन राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने येदुरप्पा पर मुक़दमा चलाने की अनुमति दी. हालांकि हाईकोर्ट ने पाया कि जिन आधारों पर येदुरप्पा के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की इजाज़त दी गई, वे पर्याप्त नहीं थे.

इमेज कॉपीरइट PTI

शिकायतों का दूसरा सेट निजी शिकायतों से जुड़ा था, जिसमें कुछ मामले अभी भी कोर्ट में हैं. कैग रिपोर्ट के आधार पर तीसरे सेट में 15 मामले दर्ज कराए गए थे, जिन्हें हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है.

येदुरप्पा की क़ानूनी टीम में शामिल एक सदस्य ने पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर कहा, ''येदुरप्पा के ख़िलाफ़ प्रभावी तौर पर तीन मामले लंबित हैं. एक सीबीआई की विशेष अदालत में है, जिसमें 105 गवाहों की सुनवाई हो चुकी है और 50 अन्य की सुनवाई अगले कुछ सप्ताह में होनी है. यह मामला दक्षिण पश्चिम खनन क्षेत्र से जुड़ा है.''

वकील ने यह भी बताया, ''येदुरप्पा के ख़िलाफ़ चलाए गए पहले और दूसरे सेट के मामले जनता दल (एस) के अभियान के आधार पर शुरू किए गए थे, जबकि तीसरे सेट की शुरुआत कांग्रेस ने की है.''

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता जगदीश शेट्टार ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''ये मामले राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं. ऐसे में अब येदुरप्पा के सामने कोई मुश्किल नहीं है.''

तो क्या येदुरप्पा पार्टी अध्यक्ष के तौर पर वापसी करेंगे? इसके जवाब में शेट्टार कहते हैं, ''ये क़ानूनी बाधाएं राज्य में उनके पार्टी अध्यक्ष बनने की राह में कोई बाधा नहीं हैं.''

येदुरप्पा की अहमियत का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक जनता पक्ष नाम से अपनी क्षेत्रीय पार्टी बनाई, तो उनकी पार्टी 10 फ़ीसदी वोट हासिल करने में कामयाब रही.

2014 में जब वे पार्टी में लौटे तब संसदीय चुनाव में उन्होंने राज्य की 28 सीटों में 17 पर पार्टी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

येदुरप्पा राज्य के सवर्ण समूह लिंगायत से हैं, जो परंपरागत तौर पर कांग्रेस का विरोधी रहा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार