युआन की लंगड़ी से धराशाई हो सकता है रुपया

युआन

गुरुवार को चीन के मुख्य बाज़ार में सात फ़ीसदी गिरावट के बाद बाज़ारों को दिन भर के लिए बंद कर दिया गया. एक हफ़्ते में दूसरी बार चीन में बाज़ारों में सौदेबाज़ी को रोकना पड़ा है.

चीन के बाज़ारों में भयंकर गिरावट आई है और चीन के बाज़ारों में जो संकट है उसका असर दुनिया भर के बाज़ारों में दिख रहा है.

बीबीसी संवाददाता दिनेश उप्रेती ने आर्थिक मामलों के जानकार सुदीप बंदोपाध्याय से पूछा कि इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है.

चीन के बाज़ारों में गिरावट की वजह से दुनिया भर के निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति आ रही है. इससे जर्मनी, अमरीका जैसे मजबूत बाज़ारों में भी भारी गिरावट नज़र आ रही है.

भारत का बाज़ार भी इससे अछूता नहीं है और यहां गिरावट की स्थिति को देखते हुए कहा नहीं जा सकता कि बाज़ार कहां तक गिरेगा.

चीन दरअसल बहुत बड़ा बाज़ार है. यह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसमें इतना बड़ा संकट आएगा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर दिखेगा ही.

पिछले साल जब ग्रीस, पुर्तगाल जैसी छोटी अर्थव्यस्थाओं में संकट था तब भी बाजारों में दिक्कत दिख रही थी.

चीन सरकार लगातार जो युआन का अवमूल्यन कर रही है उसका भारत की अर्थव्यवस्था पह बेहद घातक असर पड़ सकता है.

अगर रुपये में उसके बराबर ही अवमूल्यन नहीं किया जाता तो निर्यात आधारित क्षेत्र प्रतियोगिता में टिकने लायक नहीं रह जाएंगे.

इमेज कॉपीरइट Reuters

और अगर रुपये में इस हद तक अवमूल्यन हो गया तो हमारे सारे निर्यात फिर से महंगे हो जाएंगे.

चीन की मुद्रा का इतना भारी अवमूल्यन भारत के हित में नहीं है. इसके अलावा चीन के उत्पादक सस्ता माल भारत में डंप करने की कोशिश करेंगे और उसका असर भारतीय उत्पादन क्षेत्र पर पड़ेगा.

इस तरह युआन के अवमूल्यन से भारतीय अर्थव्यस्था, भारतीय बाज़ार में अस्थिरता आने की आशंका है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार