स्निफ़र डॉग नहीं तो पालतू कुत्ता ही सही!

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यूँ तो भारत में ‘जुगाड़’ की काफ़ी चर्चा होती है, लेकिन जब हाई अलर्ट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में भी ‘जुगाड़’ से काम चलने लगे, तो स्थिति ख़तरनाक हो सकती है.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले में पुलिस ने यात्रियों की चेकिंग के लिए तब ‘जुगाड़’ से काम लिया, जब उन्हें तत्काल स्निफ़र डॉग नहीं मिले.

ऐसे में पुलिस कोतवाल ने अपने पालतू कुत्ते से ही स्निफ़र डॉग का काम ले लिया.

मुरादाबाद के पुलिस कप्तान नितिन तिवारी ने बीबीसी के साथ बातचीत में इसकी पुष्टि की है.

नितिन तिवारी ने बताया, "मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जल्द ही रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है."

दरअसल पठानकोट एयरबेस पर चरमपंथी हमले के बाद उत्तर प्रदेश के भी कई ज़िलों में हाई अलर्ट की चेतावनी जारी की गई है. लिहाज़ा आने-जाने वाली गाड़ियों और यात्रियों की चेकिंग के आदेश दे दिए गए.

मुरादाबाद में पुलिस के एक कोतवाल को जब प्रशिक्षित स्निफ़र डॉग नहीं मिला, तो वह अपने पालतू कुत्ते को ही ‘स्निफ़र डॉग’ बनाकर चेकिंग के लिए निकल पड़े. रेलवे स्टेशन पर उसे घुमाने के बाद कोतवाल साहब ने मुसाफ़िरों से लेकर ट्रेन तक चेक कर डाली.

जबरन चेकिंग का काम कराने से कुछ ही देर बाद कोतवाल साहब का कुत्ता बौखला गया और उसने हंगामा शुरू कर दिया. कुछ ही देर बाद यात्री भी इस हक़ीकत को समझ गए और विरोध करने लगे.

इसके बाद कोतवाल साहब अपने कुत्ते समेत वहां से चले गए. लेकिन उनकी और कुत्ते की तस्वीरें खींचकर लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करनी शुरू कर दीं.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नितिन तिवारी से जब इस बारे में बीबीसी ने बात की तो उनका कहना था कि उन्हें इसकी जानकारी अपने विभाग से नहीं बल्कि अगले दिन स्थानीय अख़बार के माध्यम से मिली.

नितिन तिवारी का कहना था कि संज्ञान में आने के तुरंत बाद उन्होंने इसकी जांच के आदेश दे दिए.

स्निफ़र डॉग की उपलब्धता के बारे में नितिन तिवारी का कहना था कि इन्हें रखने पर हर महीने 50-60 हज़ार रुपए का ख़र्च आता है, इसलिए हर ज़िले में महज़ एक या दो स्निफ़र डॉग ही होते हैं.

हालांकि कोई ज़रूरी नहीं कि हर ज़िले में ही ऐसा हो, लेकिन ज़्यादातर ज़िलों की स्थिति यही है. इन्हीं के भरोसे पूरे ज़िले की चेकिंग का ज़िम्मा होता है, फिर चाहे सामान्य स्थिति हो या फिर हाई अलर्ट की.

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