एक अरब मोबाइल ग्राहक भारत को कहाँ ले जाएँगे?

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भारत में अब 100 करोड़ मोबाइल ग्राहक हैं. मोबाइल सेवा शुरू होने के क़रीब 20 साल बाद भारत ने ये आंकड़ा पार कर लिया है.

चीन ने 2012 में एक अरब का आंकड़ा पार किया था. चीन और भारत दुनिया में सिर्फ़ दो देश हैं जहाँ एक अरब से अधिक मोबाइल ग्राहक हैं.

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देश के क़रीब 80 हज़ार सरकारी बैंकों की शाखाएं लोगों तक मोबाइल के ज़रिए अब अपनी सेवाएं पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं.

आधे देश में अभी भी बैंकिंग सेवा नहीं है. अगर डेढ़ लाख से ज़्यादा डाकघरों के ज़रिए ऐसी सेवाएं लोगों तक पहुंचाई जाएं तो पूरे देश में जल्दी ही ये सेवा पहुंचाई जा सकती है.

कई तरह की सरकारी सेवाएं अब मोबाइल फ़ोन के ज़रिये पहुंचाई जा रही हैं. किसान कॉल सेंटर अब किसानों को उनकी अपनी भाषा में खेती से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं. कई जगहों पर मछुआरे और किसान अब मंडी में क़ीमत पता करके अपना सामान बेचने जाते हैं.

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दूरसंचार विभाग जो लंबे समय में नहीं कर पाया उसे कंपनियों के बीच ज़बरदस्त प्रतिस्पर्धा ने कर दिखाया है. सरकार के लिए ये सीख रही है कि ग्राहक को तभी फ़ायदा होगा जब कंपनियों के बीच ऐसी ही प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी.

मोबाइल फ़ोन इंडस्ट्री को अपने पहले 10 लाख ग्राहक जुटाने में क़रीब पांच साल लग गए थे.

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20 साल पहले जब मोबाइल सेवा शुरू की गई थी तब कॉल करने के 16 रुपये 80 पैसे प्रति मिनट तक लगते थे.

बिहार, उड़ीसा और पूर्वोत्तर राज्यों में अब भी टेलीकॉम सेवा की पहुँच तुलानत्मक रूप से कम है. ऐसे राज्यों में ये संख्या बढ़ाने के लिए अब नई पहल की ज़रुरत है.

देश में पांच सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियां-एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस कम्युनिकेशन, बीएसएनएल और आईडिया- हैं.

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मोबाइल फ़ोन के ऐसे प्रचलन के कारण अब सभी कंपनियां और सरकार आपके बारे में जानकारी को आपके फ़ोन से जोड़कर ही रखना चाहती हैं.

सरकार के नीति-निर्धारण में भी टेलीकॉम का अब बड़ा योगदान है. इस क्षेत्र से होने वाले सर्विस टैक्स की कमाई से सरकार को देश के अलग-अलग हिस्से में होने वाली आर्थिक गतिविधियों के बारे में पता लगता है और इस आंकड़े पर सरकार हमेशा अपनी नज़र बनाये रखती हैं.

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